पुणे, 4 अगस्त (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) बीएचएमएस डिग्री के बाद महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल में मॉडर्न फार्माकोलॉजी सर्टिफिकेट कोर्स (सीसीएमपी) करने वाले डॉक्टरों का लंबित पंजीकरण तत्काल शुरू करने की मांग को लेकर डॉक्टरों और विभिन्न संगठनों ने आंदोलन की चेतावनी दी है. मंगलवार को पुणे श्रमिक पत्रकार संघ में आयोजित पत्रकार वार्ता में डॉक्टरों ने कहा कि यदि 8 दिनों के भीतर पंजीकरण प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो आजाद मैदान में अन्न त्याग आंदोलन किया जाएगा. डॉक्टरों का आरोप है कि महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल द्वारा जानबूझकर पंजीकरण का विरोध किए जाने के कारण यह प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई है. वर्ष 2014 से करीब 10 हजार बीएचएमएस डॉक्टरों का भविष्य प्रभावित हुआ है. पत्रकार-वार्ता में डॉ. चंदन लोखंडे, डॉ. सुनील जगताप, डॉ. राहुल कालभोर, डॉ. बालकृष्ण गायकवाड़, संदीप बुटाला, डॉ. आशय तायड़े, डॉ. सुनील मित्तल और डॉ. राजश्री पोकर्णा उपस्थित थे. डॉक्टरों ने बताया कि आईएमए और मार्ड ने दो दिन की हड़ताल की घोषणा की है, लेकिन राज्य सरकार को इसके दबाव में नहीं आना चाहिए. डॉक्टरों के प्रतिनिधियों ने चिकित्सा शिक्षा मंत्री हसन मुश्रीफ से चर्चा की है. सरकार ने सोमवार, 3 अगस्त को सीसीएमपी करने वाले बीएचएमएस डॉक्टरों के पंजीकरण को लेकर सरकारी निर्णय घोषित किया है. डॉक्टरों का कहना है कि वे पिछले 12 वर्षों से इस मांग के लिए संघर्ष कर रहे हैं, इसलिए अब बिना देरी के पंजीकरण शुरू किया जाना चाहिए. डॉ. राहुल कालभोर ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों और ग्रामीण इलाकों में चिकित्सा सेवा देने वाले करीब 90 प्रतिशत डॉक्टर बीएचएमएस स्नातक हैं. उनकी सेवाओं से स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ने वाला दबाव कम होता है. उन्होंने कहा कि बीएचएमएस का पाठ्यक्रम कई मामलों में एमबीबीएस के समान है. हालांकि, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने इस पाठ्यक्रम के विरोध में मुंबई उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी. डॉक्टरों के अनुसार, न्यायालय ने इस मामले में स्थगन आदेश नहीं दिया है. इसलिए सरकार को अब तत्काल पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए.