त्रिफला के तीन घटकाें (हरड, बहेड़ा, आंवला) में बहेड़ा एक महत्वपूर्ण घटक है. इसका विशाल वृक्ष हाेता है. इसके फल का अक्सर छिलका ही प्रयाेग में लाया जाता है. आँताें में संक्रमण हाे या रलळवळीूं की समस्या हाे; इसे त्रिफला के रूप में लिया जा सकता है. यह निरापद है. पुरानी से पुरानी खांसी में इसके साफ टुकड़े काे मुंह में रखकर चूसते रहें.
खांसी बलगम सब खत्म हाे जाएगा.
श्वास संबंधी किसी भी समस्या के लिए इसके फल के छिलके या पेड़ की छाल का काढ़ा बनाकर पीयें. मुंह में लार कम बनती हाे या िफर आवाज़ स्पष्ट न हाे ताे इसके फल के छिलके का चूर्ण शहद के साथ चाटें. हृदय राेग में अर्जुन की छाल और बहेड़े के फल के छिलके का चूर्ण मिलाकर या ताे ऐसे ही ले लें या िफर काढ़ा बनाकर पीयें.
पुराने से पुराने बुखार में बहेड़ा और गिलाेय काे उबालकर, छानकर पीयें. वाइट डिस्चार्ज की समस्या हाे अथवा किडनी में समस्या हाे दाेनाें ही के लिए इसका पावडर और मिश्री बराबर मात्रा में मिलाएं और एक -एक चम्मच सवेरे शाम लें. थाइराेइड की समस्या में भी यह लाभ करता है.
नेत्र राेग में इसके तने के छिलके काे शहद में घिसकर आँखाें में अंजन कर सकते हैं. इसके फल की गिरी की बारीक पेस्ट बनाकर बालाें में लगाई जाए ताे बाल मजबूत हाेते हैं और उनमें काेई राेग भी नहीं हाेते.