पिंपरी, 5 अगस्त (आ.प्र.)
मनपा के स्कूलाें में छात्राें काे स्कूली सामग्री मुहैया कराने के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) प्रक्रिया लागू न करते हुए काॅन्ट्रै्नटर के माध्यम से सामान बांटने की टेंडर प्रक्रिया निकाली गई थी. इसी बीच आयुक्त ने डीबीटी आदेश के अनुसार छात्राें के खाते में सीधे पैसे ट्रांसफर करने का एक अलग प्रस्ताव स्थायी समिति काे मंजूरी के लिए भेजा. लेकिन स्थायी समिति ने बुधवार (5 अगस्त) काे इस प्रस्ताव काे खारिज कर दिया. इसके बाद से यह सवाल उठने लगा है कि आखिर छात्राें के खाते में सीधे पैसे देने से इन्कार क्याें किया जा रहा है? मनपा के 105 प्राथमिक, 18 माध्यमिक और 203 बालवाड़ियाें में करीब 55 हजार छात्र पढ़ाई करते हैं. इन छात्राें काे शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत में नाेटबु्नस, स्कूल बैग, रेनकाेट, जूते जैसा सामान दिया जाता है.
इसके लिए मनपा कराेड़ाें रुपये खर्च करता है.
हालांकि, प्रतिवर्ष काॅन्ट्रै्नटर और अधिकारियाें की ढिलाई के कारण सामान वितरण में देरी हाेती है. सामान उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार ने भी डीबीटी के निर्देश दिए हैं. लेकिन काॅन्ट्रै्नटराें के हिताें की रक्षा के लिए मनपा ने टेंडर निकाला. शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए ई-रूपी पद्धति के अंतर्गत टेंडर निकाला गया था.
इसके लिए सरकार की ओर से विभिन्न कक्षाओं के अनुसार 3,100 रुपये से लेकर 4,475 रुपये तक की दर तय की गई है. इसे अतिरिक्त आयुक्त और मनपा आयुक्त ने मंजूरी भी दे दी थी. इसके बाद शैक्षणिक वर्ष शुरू हाे चुका है और स्कूली सामान बांटना जरूरी है. इसके अंतर्गत 60 हजार छात्राें के खाताें में सामान के लिए 24 कराेड़ 97 लाख रुपये का फंड बांटना शामिल था. लेकिन, स्थायी समिति ने इस प्रस्ताव काे खारिज कर दिया.
स्थायी समिति के इस फैसले के बाद कई सवाल खड़े हाे गए हैं. क्या प्रशासन और सत्ताधारी मिलकर टालमटाेल का खेल खेल रहे हैं और छात्राें काे परेशान कर रहे हैं, ऐसा सवाल उठ रहा है.