नई दिल्ली, 5 अगस्त (वि.प्र.)
महाराष्ट्र के ऐतिहासिक सत्ता संघर्ष और असली शिवसेना व धनुष-बाण चिन्ह के मुद्दे पर सुप्रीम काेर्ट में एक बार फिर तीखी बहस हुई्. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जाॅयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. माेहना की पीठ के समक्ष उद्धव ठाकरे गुट की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिबल ने आक्रामक दलीलें पेश कीं्. उन्हाेंने दलबदल कानून, चुनाव आयाेग के रुख और तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए्. मामले की अगली सुनवाई गुरुवार दाेपहर 2 बजे तय की गई है. कपिल सिबल ने अदालत में कहा एकनाथ शिंदे सहित 31 विधायकाें का सूरत और फिर गुवाहाटी जाना काेई संयाेग नहीं था. यह भाजपा के साथ मिलकर अपनी ही सरकार गिराने की एक पूर्व-नियाेजित साजिश थी.
पार्टी की बैठकाें से दूर रहना और व्हिप का उल्लंघन करना स्पष्ट करता है कि इन विधायकाें ने स्वेच्छा से पार्टी का त्याग कर दिया था.
सिबल ने कहा कि यदि इस तरह से जनमत का अपमान कर सरकारें गिराई जाएंगी, ताे चुनावी प्रक्रिया महज एक तमाशा बनकर रह जाएगी. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सबसे अहम मुद्दा उठाते हुए पूछा कि किसी राजनीतिक दल में संगठन के स्तर पर बहुमत की सटीक गणना कैसे की जाए? वहीं सिबल ने विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर पर समय बर्बाद करने का आराेप लगाया.
चुनाव आयाेग की भूमिका पर सुप्रीम काेर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
सुनवाई के दाैरान न्यायमूर्ति बागची ने सवाल किया कि धनुष-बाण का चिन्ह राजनीतिक दल का है या विधायक दल का? सिबल के मराजनीतिक दलफ जवाब देने पर न्यायमूर्ति बागची ने टिप्पणी की कि चुनाव आयाेग ने शायद गलत मापदंड अपनाया.
आयाेग काे विधायिका में बहुमत के बजाय मूल राजनीतिक दल के संगठन में बहुमत पर विचार करना चाहिए था. सिबल ने यह भी जाेड़ा कि आयाेग के पास 2013 और 2018 का शिवसेना संविधान रिकाॅर्ड में था, जिसके तहत उद्धव ठाकरे पार्टी प्रमुख थे.