आपा-धापी भरी जिंदगी में पाेषण राेज की खुराक से गुम हाेता जा रहा है. नतीजा, हम जाने-अनजाने तमाम स्वास्थ्य समस्याओं काे दावत दे बैठते हैं. ऐसे में अगर हम यह कहें कि इससे बचा जा सकता है, ताे? नियमित रूप से ताजे जूस का सेवन करने से आप न सिर्फ सेहतमंद रहेंगी, बल्कि आपकाे स्वाद से भी काेई समझाैता नहीं करना पड़ेगा.
ताजे बने जूस के ढेराें फायदे हैं.
इसे पीने से तुरंत ऊर्जा मिलती है.
जूस में माैजूद फाइटाेन्यूट्रिएंट्स और एंटीऑ्नसीडेंट शरीर की राेग प्रतिराेधक क्षमता काे बढ़ाते हैं. जूस न सिर्फ आसानी से पच जाता है, बल्कि यह शरीर के प्राकृतिक शुगर की जरूरत काे पूरा करने के साथ खून काे भी साफ रखता है. ताजा जूस शरीर काे भीतर से साफ करके शरीर में पानी की कमी काे भी दूर करता है. ये ताे हुए जूस के फायदे, पर इसके अलावा उसका स्वाद और उससे जुड़ी सावधानियां भी मायने रखती हैं.
स्वादिष्ट जूस का फाॅर्मूला जूस में सेहत और स्वाद की जुगलबंदी के लिए एक फाॅर्मूला बना लेना बेहतर हाेगा. ऐसा करने के लिए जूस में थाेड़ासा खट्टापन, खुशबू और मसालाें के चटकारे सभी काे शामिल कीजिए. जूस में मिठास के लिए सेब, केला, आम, अन्ननास, संतरा आदि फलाें काे शामिल कीजिए, जबकि खटास की जिम्मेदारी नीबू की हाेगी.
हरियाली के लिए पालक, गाेभी, सरसाें के पत्ते, ब्राेकली आदि काे शामिल कीजिए. खुशबू के लिए तुलसी, अजवाइन, पुदीना, धनिया आदि काे जूस का हिस्सा बनाइए. जूस में मसाले का तड़का शामिल करने के लिए अदरक या काली मिर्च का प्रयाेग किया जा सकता है. जूस बनाने के लिए उन तमाम प्राकृतिक चीजाें का प्रयाेग कीजिए, जिन्हें खाना आपकाे पसंद है. यहां आपकाे यह समझना हाेगा कि जूस भी उन्हीं चीजाें का निचाेड़ है, जिन्हें आप रसाेई में सबसे ज्यादा पसंद करती हैं. हाे सकता है कि आप जिन चीजाें का सलाद बनाती हाें, उन्हीं की जुगलबंदी से आप एक बेहतरीन जूस भी तैयार कर लें.
यहां जरूरत सिर्फ इस बात काे ध्यान में रखने की है कि तमाम सामग्री के अनुपात में आपकाे आवश्यकतानुसार बदलाव करना हाेगा. जूस के स्वाद में संतुलन रखना भी जरूरी है. जूस बनाने के बाद उसे चखिए और आवश्यकतानुसार उसमें बदलाव कर लीजिए. जैसे जूस खट्टा कम है ताे उसमें नीबू की कुछ बूंदें डाल दीजिए और अगर जूस ज्यादा खट्टा हाे गया है ताे सेब से स्वाद संतुलित कर लीजिए.