खाना मांगने पर बेटी की हत्या, आरोपी मां को जमानत

गुजरात हाईकोर्ट बोला- यह समाज की सामूहिक विफलता, कमजोरों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी

    07-Aug-2026
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अहमदाबाद, 6 अगस्त (वि.प्र.)
गुजरात हाईकाेर्ट ने उस महिला काे जमानत दे दी है, जिस पर अपनी दाे साल की बेटी काे खाना मांगने पर पीट-पीटकर मार डालने का आराेप है. काेर्ट ने इस घटना काे समाज की सामूहिक विफलता करार दिया.
 
जस्टिस हसमुख डी सुथार की बेंच ने कहा कि यह घटना हृदयविदारक है. भूख केवल आर्थिक मुद्दा नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा, न्याय और विवेक का विषय है. यह घटना सामाजिक कल्याण तंत्र की विफलता काे दर्शाती है. यह राज्य और समाज की नैतिक जिम्मेदारी है कि वे कमजाेर परिवाराें, विशेषकर महिलाओं और बच्चाें की रक्षा करें. काेर्ट ने कहा कि भारतीय संविधान के तहत छह साल तक के बच्चाें काे प्रारंभिक देखभाल और शिक्षा का माैलिक अधिकार प्राप्त है. राज्य सरकार का कर्तव्य है कि वह पाेषण के स्तर और जीवन स्तर काे ऊपर उठाए. काेर्ट ने अपने फैसले में पन्नालाल पटेल के गुजराती उपन्यास ‘मानवीनी भवाई’ और विक्टर ह्यूगाे के ‘लेस मिजरेबल्स’ का जिक्र किया. साथ ही महात्मा गांधी, चार्ल्स डिकेंस, अरस्तू और विभिन्न धर्माें के ग्रंथाें का हवाला देते हुए कहा कि भूखे काे भाेजन कराना पवित्र कर्तव्य है. आराेपी महिला लखीबेन साेलंकी तीन बच्चाें की मां है. उसे मार्च 2026 में सूरत के वराछा पुलिस स्टेशन में दर्ज मामले में गिरफ्तार किया गया था. अभियाेजन पक्ष के अनुसार, महिला ने अपनी बेटी काे तब पीटा था, जब वह भूख के कारण खाना मांग रही थी. महिला के वकील ने जमानत की मांग करते हुए बताया कि वह सात महीने की गर्भवती है. उसके दाे अन्य बच्चे हैं, जिनमें से एक बच्चा उसके साथ जेल में है और दूसरा घर पर अकेला है.