लद्दाख, 6 अगस्त (वि.प्र.)
आत्मनिरीक्षण कराे और सिस्टम में सुधार कराे यह बात प्रसिध्द शिक्षाविद् और पर्यावरणवादी साेनम वांगचुक ने एक इंटरव्यू में कही. उन्हाेंने एक इंटरव्यू के दाैरान सवाल के जवाब में केंद्र सरकार काे दी सलाह.कहा - सरकार साेचे की आखिर छात्र आंदाेलन करने मजबूर ्नयाे हुए, अपनी खामियाें पर ध्यान देकर सुधार करने की जरुरत है.
नीट पेपर लीक के विराेध में जंतर-मंतर पर हुए सीजेपी प्राेटेस्ट के दाैरान प्रधानमंत्री और सरकार काे अपशब्द कहने के कई वीडियाे वायरल हैं. इन वीडियाे की भाषा काे लेकर जब 26 दिन तक अनशन पर रहे पर्यावरणविद और एक्टिविस्ट साेनम वांगचुक से सवाल किया गया ताे उन्हाेंने अपशब्दाें पर आपत्ति जताई. एक इंटरव्यू देते हुए जब साेनम वांगचुक से पूछा गया कि इन युवाओं काे पीएम माेदी ने भटके हुए युवा कहा ताे साेनम बाेले, मैं गाली-गलाैज वाली भाषा काे बिल्कुल मंजूरी नहीं देता.लेकिन सरकार के लिए यह इस बात का संकेत है कि हमारे युवा कितने फ्रस्ट्रेटेड हाे गए हैं.
साेनम ने आगे कहा कि अगर मैं प्रधानमंत्री की जगह हाेता, ताे सबसे पहले मैं खुद से पूछता कि मैंने इतना बुरा क्या किया है जाे इनमें इतना गुस्सा पैदा कर दिया. यह प्राेफेशनल प्रदर्शनकारी या सड़क के तत्व नहीं हैं. यह विभिन्न काेर्साें में पढ़ने वाले असली हताश युवा हैं. अपनी बात आगे बढ़ाते और समझाते हुए वांगचुक आगे बाेले, यह इस बात का संकेत है कि हालात कितने खराब हाे गए हैं. जैसा मैं हमेशा कहता हूं- संदेश सुनाे, संदेशवाहक काे मत माराे.एफआईआर और उत्पीड़न बहुत निम्न स्तर की प्रतिक्रिया है. वांगचुक ने यह भी कहा कि अंदर देखाे, आत्मनिरीक्षण कराे और सिस्टम में सुधार कराे ताकि काेई इतना हताश न हाे कि ऐसी भाषा इस्तेमाल करे. एक अच्छे नेता काे ऐसा ही साेचना चाहिए. लेकिन मैं कहूंगा कि शरारती तत्व, प्राेफेशनल शरारती या हिस्ट्री-शीटर जाे इनमें घुसपैठ करते हैं, उन्हें स्वीकार नहीं करना चाहिए.