कोथरुड़, 8 अगस्त (आ. प्र.) श्री वर्धमान सांस्कृतिक प्रतिष्ठान, कोथरुड, पुणे में विराजित गुरु सुमति शिष्य, उपप्रवर्तक, तप दिवाकर गुरुदेव श्री अभिषेक मुनिजी म. सा. ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि, जीवन में यदि बुरी आदतों का समावेश हो जाए तो व्यक्ति धीरे-धीरे पतन की ओर बढ़ता चला जाता है. किसी व्यक्ति को यदि कोई बुरी आदत लग जाए तो उसका वर्तमान ही नहीं, बल्कि भविष्य भी प्रभावित होने लगता है. एक बार आदत जीवन का हिस्सा बन जाए तो उससे छुटकारा पाना कठिन हो जाता है. आदत चाहे कैसी भी हो, छोटी-सी आदत भी धीरे-धीरे व्यक्ति को अपना गुलाम बना लेती है. इन्हीं आदतों के कारण व्यक्ति का पारिवारिक एवं सामाजिक जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है. इसलिए समय रहते बुरी आदतों को पहचानकर उनसे मुक्त होने का प्रयास करना चाहिए. आज सोशल मीडिया के माध्यम से हम कितने ही मित्र बना लें, हमारे कितने भी फॉलोअर्स हों, लेकिन जीवन की विकट परिस्थितियों में सबसे पहले परिवार के सदस्य ही हमारे साथ खड़े होते हैं. इसलिए आभासी रिश्तों के साथ-साथ वास्तविक रिश्तों की गरिमा और महत्ता को समझना आवश्यक है. एक समय था जब 60 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थी को भी होनहार माना जाता था, लेकिन आज परिस्थितियां बदल गई हैं. बच्चों पर शत-प्रतिशत अंक प्राप्त करने का दबाव बढ़ता जा रहा है. परिणामस्वरूप बच्चे शिक्षा के प्रति तो अधिक जागरूक हो रहे हैं, लेकिन संस्कारों के क्षेत्र में पिछड़ते जा रहे हैं. शिक्षा निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन उसके साथ संस्कार भी उतने ही आवश्यक हैं. संस्कारों के बिना शिक्षा अधूरी है, क्योंकि शिक्षा व्यक्ति को ज्ञान देती है, जबकि संस्कार उस ज्ञान का सही दिशा में उपयोग करना सिखाते हैं.