फ्लैट खरीदने से पहले एग्रीमेंट व उसकी शर्तों को ध्यान से पढ़ें

फ्लैट खरीदते समय कानूनी अधिकार के उपलब्ध उपायों पर एड. बी.एस. धापटे से विशेष बातचीत

    09-Aug-2026
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 एड. भालचंद्र धापटे
मोबाइल-9850166213
 
अपना फ्लैट होना हर व्यक्ति का सपना होता है. लेकिन जीवनभर की बचत या बड़ा होम लोन लगाकर फ्लैट खरीदते समय केवल बिल्डर के विज्ञापनों और आश्वासनों पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है. प्रोजेक्ट में देरी, वादे के मुताबिक सुविधाएं न मिलना, समय पर कब्जा न मिलना या एग्रीमेंट की जटिल शर्तों के कारण कई खरीदार परेशानियों में फंस जाते हैं. ऐसी परिस्थितियों में रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 यानी फ्लैट खरीदारों के लिए एक महत्वपूर्ण कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है. इसके तहत खरीदारों को कौन-कौन से अधिकार मिलते हैं? फ्लैट खरीदने से पहले किन दस्तावेजों की जांच करनी चाहिए? कब्जा मिलने में देरी होने पर खरीदार क्या कर सकता है? और क्या ग्राहक आयोग में भी शिकायत की जा सकती है? इन्हीं महत्वपूर्ण सवालों के जवाब एड. बी.एस. धापटे ने दै. आज का आनंद से बातचीत में दिए. प्रस्तुत है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश  
 
प्रश्न- रेरा क्या है और यह फ्लैट खरीदारों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर - रेरा यानी रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 केंद्र सरकार द्वारा लागू किया गया एक महत्वपूर्ण कानून है. इसका मुख्य उद्देश्य रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता लाना और फ्लैट खरीदारों के हितों की रक्षा करना है. रेरा लागू होने से पहले कई बार बिल्डर ग्राहकों से बड़ी रकम ले लेते थे, लेकिन प्रोजेक्ट समय पर पूरा नहीं करते थे. विज्ञापनों में दिखाई गई सुविधाएं वास्तविक रूप से उपलब्ध नहीं कराई जाती थीं या आवश्यक मंजूरी के बिना ही फ्लैट की बिक्री किए जाने की शिकायतें सामने आती थीं. इसके कारण कई परिवारों की जीवनभर की कमाई फंस जाती थी. रेरा लागू होने के बाद पात्र प्रोजेक्ट्स का पंजीकरण अनिवार्य किया गया. खरीदारों को प्रोजेक्ट से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी देखने का अधिकार मिला. बिल्डर के लिए एग्रीमेंट के अनुसार समय पर कब्जा देना जरूरी हुआ. साथ ही शिकायतों के समाधान के लिए स्वतंत्र प्राधिकरण की व्यवस्था की गई.इस तरह फ्लैट खरीदारों के लिए महत्वपूर्ण कानूनी सुरक्षा का आधार बन गया है.
प्रश्न- फ्लैट खरीदने से पहले किन बातों की पुष्टि करना जरूरी है?
उत्तर- फ्लैट खरीदना जीवन के सबसे बड़े आर्थिक फैसलों में से एक होता है. इसलिए केवल आकर्षक विज्ञापन, कम कीमत या बिल्डर के ओशासनों के आधार पर फैसला लेना उचित नहीं है. सबसे पहले यह जांचना जरूरी है कि संबंधित प्रोजेक्ट का पंजीकरण हुआ है या नहीं. इसके बाद जमीन के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज, स्वीकृत बिल्डिंग प्लान, आवश्यक सरकारी मंजूरियां, प्रोजेक्ट पूरा होने की अनुमानित तारीख और एग्रीमेंट की सभी शर्तों को ध्यानपूर्वक देखना चाहिए. बिल्डर द्वारा पहले पूरे किए गए प्रोजेक्ट्स की जानकारी लेना, उसके खिलाफ कोई शिकायत या विवाद है या नहीं, इसकी जांच करना भी महत्वपूर्ण है. संभव हो तो सौदा करने से पहले कानूनी सलाह लेना चाहिए. किसी भी एग्रीमेंट को बिना पढ़े हस्ताक्षर करना बड़ी गलती हो सकती है. खरीद से पहले की गई उचित जांच भविष्य में होने वाले आर्थिक नुकसान और कानूनी विवाद से बचा सकती है.
प्रश्न- अगर बिल्डर तय समय पर फ्लैट का कब्जा नहीं देता तो खरीदार के क्या अधिकार हैं?
उत्तर- कई मामलों में फ्लैट खरीदार पूरी रकम या बैंक का कर्ज चुकाने के बावजूद वर्षों तक अपने फ्लैट का कब्जा नहीं पा पाते. ऐसी स्थिति में खरीदार को महत्वपूर्ण कानूनी अधिकार देता है. रेरा की धारा 18 के अनुसार, यदि बिल्डर ने एग्रीमेंट में तय समय के भीतर फ्लैट का कब्जा नहीं दिया है, तो लागू कानूनी प्रावधानों और एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार खरीदार को देरी की अवधि के लिए ब्याज मिलने का अधिकार हो सकता है. यदि खरीदार प्रोजेक्ट में आगे नहीं रहना चाहता, तो लागू प्रावधानों के तहत उसके द्वारा जमा की गई राशि ब्याज सहित वापस मांगने का अधिकार भी हो सकता है. इसके लिए संबंधित प्राधिकरण के समक्ष शिकायत दर्ज की जा सकती है. इसलिए कब्जा मिलने में अनावश्यक देरी होने पर खरीदार को केवल इंतजार करते रहने के बजाय उपलब्ध कानूनी उपायों का इस्तेमाल करना चाहिए.
प्रश्न- रेरा लागू होने के बाद भी क्या ग्राहक आयोग या कोर्ट में जा सकते हैं?
उत्तर- हां. यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है कि लागू होने के बाद फ्लैट खरीदार केवल प्राधिकरण के पास ही शिकायत कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने एम/ एस इम्पीरिया स्ट्रक्चर्स लिमिटेड बनाम अनिल पटनी (2020) के महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि और उपभोक्ता संरक्षण कानून दोनों ही उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने वाले कानून हैं. इसलिए उचित परिस्थितियों में फ्लैट खरीदार के पास ग्राहक आयोग जाने का विकल्प भी हो सकता है. इसी तरह न्यूटेक प्रमोटर्स एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश (2021) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र से संबंधित महत्वपूर्ण स्थिति स्पष्ट की. हालांकि, कौन-सा कानूनी रास्ता अपनाया जाए, यह प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है. इसलिए उचित कानूनी सलाह लेकर सही मंच पर शिकायत करना अधिक सुरक्षित होता है.
प्रश्न- आज के समय में फ्लैट खरीदारों को सबसे बड़ी कौन-सी गलती करने से बचना चाहिए?
उत्तर- आज कई लोग केवल कम कीमत, आकर्षक ऑफर या बड़े-बड़े विज्ञापनों को देखकर फ्लैट बुक कर लेते हैं. यही सबसे बड़ी गलती साबित हो सकती है. किसी भी सौदे से पहले पंजीकरण, जमीन के दस्तावेज, स्वीकृत नक्शा, आवश्यक मंजूरियां, एग्रीमेंट की शर्तें और कब्जा मिलने की तारीख की जांच करना बेहद जरूरी है. इसके अलावा हर भुगतान की रसीद सुरक्षित रखनी चाहिए और बिल्डर के साथ किए गए महत्वपूर्ण लेन-देन को लिखित रूप में रखना चाहिए. एग्रीमेंट की शर्तों को समझे बिना उस पर हस्ताक्षर नहीं करना चाहिए. कानून नागरिकों के हितों की रक्षा करता है, लेकिन अपने अधिकारों की जानकारी होना भी उतना ही जरूरी है. इसलिए फ्लैट में निवेश करने से पहले पूरी जानकारी हासिल करना, जरूरत पड़ने पर अनुभवी वकील की सलाह लेना और जल्दबाजी में फैसला न करना ही सुरक्षित निवेश की कुंजी है.