माहेश्वरी समाज का प्रमुख त्योहार ‘तीज’ 31 अगस्त को बड़ी धूमधाम से मनाया गया. इस दिन को भगवान शिव और पार्वती के पुनर्मिलन के रूप में देखा जाता है. इस दिन सुहागिन महिलाओं ने नए वस्त्र और श्रृंगार धारण कर उपवास रखा. शाम को माता पार्वती की षोडशोपचार से पूजा की. पूजा हेतु सत्तू के आटे से ‘पिंडा’ नामक विशेष व्यंजन तैयार किया जाता है. तीज की पूर्व संध्या को ‘सिंधारा’ के अवसर पर नवविवाहित वधुओं को ससुराल पक्ष द्वारा उपहार प्रदान किए गए. सत्येंद्र राठी ने जानकारी दी कि गणगौर के बाद आने वाले सभी तीज-त्यौहारों की शुरुआत इसी ‘तीज’ के बाद से होती है.