इच्छाओं पर नियंत्रण भी महान तप है : श्री अभिषेक मुनिजी

पर्यूषण में ‌‘स्वच्छ मन अभियान‌’ चलाना है वैर का विसर्जन करने वाला विराट बनता है

    10-Sep-2026
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 कोथरुड, 9 सितंबर (आ. प्र.)

श्री वर्धमान सांस्कृतिक प्रतिष्ठान में विराजित गुरुदेव श्री अभिषेक मुनिजी ने कहा कि, निर्जरा के 12 भेद हैं, जिनमें छह बाह्य और छह अभ्यंतर तप बताए गए हैं. ये सभी तप एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. आज हमने उपवास को ही तपस्या का पर्याय मान लिया है, जबकि केवल अनशन कर लेना ही तप नहीं है. कषायों (क्रोध, मान, माया और लोभ) को जीतना, इच्छाओं पर नियंत्रण रखना और मन को संयमित करना भी महान तप है. कर्मबंध के प्रमुख कारण मन, वचन और काया हैं और निर्जरा भी इन्हीं के माध्यम से होती है. इनमें मन कर्मबंध का अत्यंत महत्वपूर्ण कारण है. प्रभु महावीर काया से कठिन आसन में स्थिर, वाणी से मौन और मन से सामने उपस्थित पदार्थ पर एकाग्र रहते थे. जब मन, वचन और काया तीनों स्थिर हो जाते हैं, तब कर्मों के आगमन का मार्ग अर्थात्‌‍ आश्रव रुक जाता है और संवर प्रारंभ होता है. ‌‘ पर्यूषण केवल पर्व मनाने का अवसर नहीं, बल्कि अपने भीतर के कषायों को पहचानने, इच्छाओं को सीमित करने और आत्मा को कर्मबंधन से मुक्त करने की साधना का भी पर्व है.