दया, अहिंसा, सेवा जैसे गुण स्त्री वाची होते हैं

    10-Sep-2026
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osho 
मलूक कहते हैं: एक सूत्र की बात समझ लाे कि दया सूत्र है. तुम्हारी पूजा-प्रार्थना, तुम्हारे मंदिर मस्जिद से दया बढ़े, ताे ठीक. दुनिया के सभी संताें ने यही कहा महावीर कहते हैं- अहिंसा.
 
वह दया के लिए उनका नाम है. बुद्ध कहते हैं- करुणा. वह दया के लिए उनका नाम है. जीसस कहते हैं- सेवा. वह दया के लिए उनका नाम है. दया कहाे, सेवा कहाे, करुणा कहाे, अहिंसा कहाे-ये नाम भर के भेद हैं. लेकिन एक बात खयाल रखना: चाराें शब्द स्त्री वाची हैं. दया, करुणा, अहिंसा, सेवा- सब स्त्रैण हैं. यह बात समझने जैसी है. भाषा भी अकारण नहीं बनती.
भाषा भी धीरे-धीरे किन्हीं कारणाें से निर्मित हाेती है.
 
पुरुष का हृदय कठाेर है. इसलिए कठाेरता काे हम पुरुषता कहते हैं. वह पुरुष ने बना हुआ शब्द है. पुरुष का चित्त आक्रामक है; हिंसात्मक है. पुरुष की सारी आकांक्षा दूसराें पर कब्जा कर लेने की है, मालकियत कर लेने की है.
राज्य ैले, साम्राज्य बने.
 
पुरुष बड़ा मजा लेता है- शक्तिशाली हाेने में. उसकी सारी खाेज शक्ति की है. कितनी मेरी सत्ता हाे-कि प्रधानमंत्री, कि राष्ट्रपति- कि कितनी मेरी सत्ता हाे, कि सारी पृथ्वी पर मेरा राज्य हाे जाए-ऐसी पुरुष की आकांक्षा है. स्वभावतः जब तुम दूसरे पर सत्ता कराेगे, ताे दया न कर सकाेगे. दुनिया में दाे ही बातें हैं: या ताे तुम दूसरे के ऊपर चढ़ जाओ, नहीं ताे दूसरा तुम्हारे ऊपर चढ़ जाएगा. यही ताे मैक्यावेली ने कहा कि है कि अगर तुमने न लूटा ताे लूटे जाओगे. इसके पहले कि काेई लूटे, तुम लूट लाे.