जयपुर, 9 सितंबर (वि.प्र.)
दादा की संपत्ति पर पाेते का अधिकार नहीं है. यह टिप्पणी एक सुनवाई के दाैरान राजस्थान हाईकाेर्ट ने की. पिता द्वारा बेची गई 75 बीघा जमीन के मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा.
काेर्ट ने कहा- पिता के जीवित रहते दादा की संपत्ति पर पाेता अधिकार नहीं जता सकता है. बेची गई जमीन पर उसकी आपत्ति कानूनन अवैध है. पाेते का दावा था कि दादा की जमीन में उसका भी हिस्सा है और उसकी सहमति के बिना जमीन नहीं बेची जा सकती. लेकिन मामला सिर्फ दादा की जमीन हाेने तक सीमित नहीं था.
सवाल यह था कि दादा की मृत्यु के बाद उनके बेटाें काे मिली जमीन क्या पाेते के लिए पैतृक संपत्ति बनी या पिता की पर्सनल विरासत हाेगी? राजस्थान हाईकाेर्ट ने दादा की जमीन पर पाेते के अधिकार काे लेकर एक अहम फैसला सुनाया है. काेर्ट ने साफ किया कि केवल इस आधार पर कि जमीन उसके दादा की थी, पाेता उस पर अपना जन्मसिद्ध या पैतृक अधिकार नहीं जता सकता.
अगर दादा की मृत्यु बिना वसीयत के हाेती है और उनकी संपत्ति हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम, 1956 की धारा 8 के तहत उनके क्लास-वन उत्तराधिकारियाें काे मिलती है, ताे बेटे के हिस्से में आई संपत्ति उसकी पर्सनल विरासत मानी जाएगी. ऐसी स्थिति में पिता के जीवित रहते बेटा यानी पाेता उस प्राॅपर्टी या जमीन की सेल पर आपत्ति नहीं जता सकता. यह मामला राजस्थान के जैसलमेर की 75 बीघा जमीन से जुड़ा है.