जैन समाज की संस्कृति विशेष सराहनीय

सांसद मेधा कुलकर्णी ने व्यक्त किए विचार : 2026 चातुर्मास के प्रमुख आधारस्तंभों को किया सम्मानित

    10-Sep-2026
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बिबवेवाड़ी, 9 सितंबर (आ.प्र.)

जैन समाज की अहिंसा, शांति और संयम की संस्कृति की विशेष सराहनीय है. जैन समाज ही एकमात्र ऐसा समाज है, जो अपने सभी त्यौहार और धार्मिक कार्यक्रम अत्यंत शांति और संयम के साथ मनाता है. जैन समाज अहिंसा का संदेश न केवल अपने आचरण से देता है, बल्कि हिंसा से स्वयं की और दूसरों की भी रक्षा करता है; ऐसे विचार राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी ने रखे. वे ‌‘2026 चातुर्मास के प्रमुख आधारस्तंभ‌’ इस विशेष सम्मान समारोह में बोल रही थीं. बिबवेवाड़ी स्थित श्री जैन स्थानक में अत्यंत भक्तिमय और उत्साहपूर्ण वातावरण में यह कार्यक्रम संपन्न हुआ. इसमें मेधा कुलकर्णी के हाथों चातुर्मास के सफल आयोजन में महत्त्वपूर्ण योगदान देने वाले प्रमुख आधारस्तंभों को सम्मानित किया गया. इस पावन अवसर पर देश भर से महासाध्वी जी के बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए. विशेष रूप से हैदराबाद, मध्य प्रदेश, मेवाड़, राजस्थान और इंदौर आदि क्षेत्रों से आए भक्तों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई. साथ ही पुणे के विभिन्न जैन श्रीसंघों के पदाधिकारी, गणमान्य व्यक्ति और अनेक श्रावक-श्राविकाएं भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे. बिबवेवाड़ी श्री संघ के अध्यक्ष पोपटलाल ओस्तवाल ने स्वागत किया और प्रस्तावना दी. माणिकचंद दुगड़ ने मुख्य अतिथियों का परिचय कराया. श्री संघ के महामंत्री गणेश ओसवाल ने मंच संचालन किया, जबकि सुनील बलाई ने धन्यवाद ज्ञापित किया. इस भव्य कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए पोपटलाल ओस्तवाल, माणिकचंद दुगड़, रमेश गुगले, पन्नालाल पितलिया, गणेश ओसवाल, अविनाश कोठारी, संपतलाल भटेवरा, सुनील बलाई, सुभाष बाफना, चंद्रकांत लुंकड़, कीर्तीराज दुगड़, बालासाहेब कर्णावट, रवि दुगड़ और प्रकाश गांधी ने अपना बहुमूल्य योगदान देकर व्यवस्था संभाली.