हरितालिका तीज और गणेश चतुर्थी एक ही दिन 14 सितंबर को : मोहन दाते
कहा- इस साल का गणेशोत्सव 12 दिन का रहेगा
11-Sep-2026
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पुणे, 10 सितंबर (आ.प्र.) इस साल गणेशोत्सव भाद्रपद शुद्ध चतुर्थी यानी सोमवार (14 सितंबर) को शुरू हो रहा है. हालांकि, भाद्रपद शुद्ध तृतीया भी उसी दिन है. इस दिन हरितालिका पूजन और श्री गणेश प्राणप्रतिष्ठापना ब्रह्ममुहूर्त से कर सकते है. सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों की गणेश मूर्तियों की स्थापना दोपहर बाद भी की जा सकती है. इस साल का गणेशोत्सव 12 दिन का है, और अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर को है, यह जानकारी पंचांगकर्ता मोहन दाते ने दी. पंचांग में हरितालिका पूजा और श्री गणेश चतुर्थी एक ही दिन 14 सितंबर को दी गई है. इस दिन तृतीया सुबह 7:07 बजे खत्म होगी. हरितालिका तृतीया के लिए सूर्योदय व्यापिनी तृतीया जशरी है, जबकि गणेश चतुर्थी के लिए चतुर्थी तिथि मध्याह्नकाल व्यापिनी होनी चाहिए. चूंकि सूर्योदयकाली तृतीया और मध्याह्नकाल चतुर्थी 14 सितंबर को हैं, इसलिए ये दोनों व्रत एक ही दिन आए हैं, ऐसा पंचांगकर्ता मोहन दाते ने कहा. पंचांगकर्ता मोहन दाते ने कहा कि तिथि का सूर्योदय के समय होना, मध्याह्न के समय होना आदि नियम व्रत का दिन तय करने के लिए हैं. व्रती केवल उस अवधि के दौरान ही पूजा करें, ऐसा नहीं है. इसलिए, 14 सितंबर को सुबह हरितालिका पूजा कर सकते हैं और श्रीगणेश के मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठापना भी कर सकते हैं. इस दिन ब्रह्म मुहूर्त यानी सुबह 4:50 बजे से दोपहर 1:51 बजे तक पार्थिव गणेश की पूजा की जा सकती है. हरितालिका का व्रत पूरे दिन रहता है, यह व्रत अगले दिन मंगलवार, 15 सितंबर को समाप्त करे. साथ ही, जो लोग ऋषि पंचमी का व्रत भी कर रहे हैं, वे 15 सितंबर को सुबह हरितालिका की उत्तर पूजा करें और उसका विसर्जन करें. फिर चावल सूंघकर मंगलवार को ऋषि पंचमी का व्रत रखें.
गौरी पूजन 17 सितंबर से
गौरी यानी महालक्ष्मी का आगमन गुरुवार, 17 सितंबर को अनुराधा नक्षत्र में शाम 7:54 बजे तक किया जा सकता है. 18 सितंबर शुक्रवार को ज्येष्ठा नक्षत्र में गौरी पूजन कर महानैवेद्य दिखाए. 19 सितंबर को मूल नक्षत्र में शनिवार को दिन में कभी भी गौरी विसर्जन किया जा सकता है, पंचांगकर्ता मोहन दाते ने कहां.