कोथरुड, 10 सितंबर (आ. प्र.) श्री वर्धमान सांस्कृतिक प्रतिष्ठान में विराजित गुरुदेव श्री अभिषेक मुनिजी ने पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व की महत्ता बताते हुए कहा कि, पर्यूषण केवल धार्मिक अनुष्ठानों का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर झांकने, विचारों को परखने और आत्मा के वास्तविक स्वरूप को पहचानने का अवसर है. यह पर्व हमें बाहरी परिस्थितियों को बदलने से पहले अपने भीतर परिवर्तन करने की प्रेरणा देता है. इंसान दुःख कहीं भी ढूंढ सकता है, क्योंकि मनुष्य के सुख-दुःख का संबंध केवल बाहरी परिस्थितियों से नहीं, बल्कि उसके भीतर चलने वाले विचारों से है. यदि मन में खुशी है तो व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी प्रसन्न रह सकता है और यदि मन में दुख है तो अनुकूल परिस्थितियां भी उसे सुख नहीं दे सकतीं. यह सब हमारे विचारों का खेल है. जैसे हमारे विचार होते हैं, वैसी ही हमारी मनोस्थिति निर्मित हो जाती है और जैसी मनोस्थिति होती है, वैसा ही हमें संसार और परिस्थितियों का व्यवहार दिखाई देने लगता है, इसलिए जीवन में परिस्थितियों से अधिक महत्वपूर्ण अपने दृष्टिकोण को समझना है. - श्री अभिषेक मुनिजी