सारसबाग, 10 सितंबर (आ.प्र.) सावन का सुहावना मौसम, फूलों की महक, रंग-बिरंगी रंगोलियां और प्रकृति से जुड़ाव दर्शाती सजावट, ऐसे भक्तिमय वातावरण से सारसबाग के सामने स्थित श्री महालक्ष्मी मंदिर परिसर सराबोर हो उठा. सजावट में फूलों, विविध प्रकार की सब्जियों, फलों और अन्य पर्यावरण-अनुकूल वस्तुओं का कलात्मक उपयोग किया गया. मंदिर में की गई आकर्षक सजावट और झूले पर विराजमान श्री महालक्ष्मी, श्री महासरस्वती तथा श्री महाकाली देवी की मूर्तियों का मनमोहक रूप श्रद्धालुओं का ध्यान आकर्षित कर रहा था. ट्रस्ट के मुख्य संस्थापक ट्रस्टी राजकुमार अग्रवाल और मुख्य ट्रस्टी अमिता अग्रवाल के मार्गदर्शन में यह उत्सव संपन्न हुआ. सावन के महीने में देवी-देवताओं को झूले पर विराजमान कर उनकी पूजा-अर्चना करने की परंपरा है. बारिश के मौसम में जब प्रकृति पूरी तरह से खिली होती है, तब फूल, पत्तियों और प्राकृतिक चीजों के माध्यम से देवताओं की सजावट करने की प्रथा कई जगहों पर देखने को मिलती है. इस परंपरा को पर्यावरण के अनुकूल बनाते हुए, इस साल के झूला उत्सव में सजावट के लिए फूलों, सब्जियों, फलों और अन्य पर्यावरणअनुकू ल (इको-फ्रेंडली) सामग्री का उपयोग किया गया. मंदिर परिसर में उकेरी गई रंग-बिरंगी रंगोलियों, फूलों की सजावट और झूले के आकर्षक श्रृंगार से उत्सव का सौंदर्य और भी निखर उठा. रोजाना शाम 7.15 बजे दर्शन की व्यवस्था की गई थी, जिसके बाद शाम 7.45 बजे विशेष झूला महाआरती का आयोजन हुआ. उत्सव के दौरान भक्तों ने सपरिवार दर्शन कर आरती का लाभ उठाया.