'स्वच्छ शहर' के नाम पर लाखों रुपयों की बर्बादी !

मोबाइल टॉयलेट प्रशासन की उपेक्षा के कारण धूल फांक रहे नागरिकों में आक्रोश

    11-Sep-2026
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swachsahar 
पिंपरी, 10 सितंबर (आ.प्र.)
मनपा का ‘स्वच्छ शहर’ का दावा कितना खाेखला है, इसकी एक तस्वीर शहर की मुख्य सड़काें और बाजाराें में सामने आई है. शहर में लाखाें रुपये खर्च कर लगाए गए ‘फाइबर-री-इंफाेर्स्ड प्लास्टिक’ (एफआरपी) के माेबाइल टाॅयलेट प्रशासन की उपेक्षा के कारण धूल फांक रहे हैं. पानी की कमी से फैलती बदबू, टूटे हुए दरवाजे और बिजली के अभाव के कारण ये शाैचालय इस्तेमाल करने याेग्य नहीं बचे हैं.
 
नागरिक आक्राेश व्यक्त कर रहे हैं कि ‘स्वच्छ सर्वेक्षण’ का महज एक दिखावा खड़ा किया जा रहा है. शहर के मुख्य बाजाराें, भीड़-भाड़ वाले स्थानाें और झुग्गी-झाेपड़ी इलाकाें में नागरिकाें की सुविधा के लिए पीले और राॅकेट या कैप्सूल के आकार के एफआरपी प्रकार के अस्थायी शाैचालय लगाए गए हैं, लेकिन, कई जगहाें पर पानी भी उपलब्ध नहीं है.
 
कई जगहाें पर ये शाैचालय ताले में बंद हैं, ताे कुछ जगहाें पर कचरा फेंकने का केंद्र बन गए हैं. क्या लाखाें रुपये खर्च कर ये शाैचालय कागजाें पर शान दिखाने के लिए लाए गए हैं? क्या अधिकारी इन शाैचालयाें पर ध्यान नहीं देते हैं? पानी की व्यवस्था क्याें नहीं की जाती है? क्या स्वच्छ सर्वेक्षण टीम काे ये शाैचालय नजर नहीं आते हैं?