नई दिल्ली, 11 सितंबर (वि.प्र./वार्ता)
भारत-रूस का काराेबार 100 अरब डाॅलर पहुंचाने का लक्ष्य दाेनाें देशाें ने रखा. भारत मंडपम में शुक्रवार काे पीएम माेदी एवं राष्ट्रपति पुतिन के बीच विभिन्न मुद्दाें पर चर्चा हुई. दाेनाें ने एक दूसरे का गर्मजाेशी से स्वागत किया. सुरक्षा, ऊर्जा, व्यापार, टे्ननाॅलाजी, लड़ाकू विमानाें सहित वित्तीय मुद्दाें पर 45 मिनट तक चर्चा हुई. दुनिया में जारी तनाव युद्ध पर भी विचार-विमर्श किया गया. पीएम माेदी ने रूसी राष्ट्रपति काे तमिल गं्रथ का रूसी अनुवाद किताब पुतिन काे भेंट की. दाेनाें ने एक दूसरे काे भराेसेमंद दाेस्त भी बताया.
ब्निस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति पेजेशाकियान सहित 11 देशाें के नेता शामिल हाेंग. आज और कल विभिन्न बैठकें भी हाेंगी.
बैठक से माेदी ने पुतिन का गले लगाया और उन्हें तमिल कवि तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध रचना तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया. इसके बाद दाेनाें नेता एक ही कार से इंडस्ट्रियल एग्जीबिशन में पहुंचे. पीएम माेदी-पुतिन के बीच क्या बातचीत हुई है अभी इसकी जानकारी सामने नहीं आई है. रिपाेर्ट्स के मुताबिक दाेनाें देशाें में बड़ी डिफेंस डील संभव है. भारत रडार की पकड़ में न आने वाला सुखाेई-57 फाइटर जेट खरीद सकता है. रूस ने इसे बनाने और जरूरी तकनीक साझा करने की पेशकश की है. सुखाेई-57 एक एडवांस स्टेल्थ फाइटर जेट है.
यह दूसरे देश में घुसकर एयरस्ट्राइक करने में गेमचेंजर साबित हाे सकता है. तिरुक्कुरल तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध रचना है. इसे तमिल वेद कहा जाता है. इसमें करीब 1,330 दाेहे हैं. इन दाेहाें में अच्छे जीवन, नैतिकता, शासन, अर्थव्यवस्था, प्रेम और इंसानी मूल्याें के बारे में बताया गया है. तिरुक्कुरल काे तमिल साहित्य की सबसे महत्वपूर्ण रचनाओं में से एक माना जाता है.