महारेरा ने लोढ़ा डेवलपर्स को दिया झटका

पुणे के दो घर खरीदारों को पैसे लौटाने का आदेश; जब्ती राशि पर लगाई रोक

    12-Sep-2026
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RERA
पुणे, 11 सितंबर (आ.प्र.)
लाेढ़ा डेवलपर्स लिमिटेड काे लगे एक झटके में, महारेरा ने इस रियल एस्टेट दिग्गज काे पुणे के दाे घर खरीदाराें की बुकिंग राशि वापस करने का आदेश दिया है, जिन्हाेंने इसके लाेढ़ा पुणे एनआईबीएम प्राेजेक्ट से अपना नाम वापस ले लिया था. इसके साथ ही प्राधिकरण ने डेवलपर की जब्ती राशि (फाॅरफाॅरचर) काे कुल फ्लैट कीमत के केवल 2 प्रतिशत तक सीमित कर दिया है. यह फैसला दाे खरीदाराें, स्नेहा जयचंद करमानी और सागर गिरधारीलाल करमानी से संबंधित है, जिन्हाेंने माेहम्मदवाड़ी स्थित प्राेजेक्ट के टावर 7 में अलग-अलग फ्लैट बुक किए थे, लेकिन बिक्री समझाैते (एग्रीमेंट फाॅर सेल) के निष्पादन से पहले अपनी बुकिंग रद्द कर दी थी.
 
यह आदेश 27 अगस्त काे महारेरा के मेंबर-1 महेश पाठक द्वारा सुनाया गया था. खरीदाराें काे प्राेजेक्ट से बाहर निकलने की अनुमति देने और उनके पैसे वापस करने का निर्देश देते हुए, प्राधिकरण ने ब्याज और मुआवजे की उनकी मांग काे खारिज कर दिया. प्राधिकरण ने पाया कि उन्हाेंने प्रस्तावित पजेशन (कब्जे) की तारीख से लगभग एक साल पहले बुकिंग रद्द कर दी थी और वे रेरा की धारा 12 या 18 के तहत राहत के आधार साबित करने में विफल रहे थे.
 
खरीदाराें ने 16 लाख से अधिक का भुगतान किया था. स्नेहा करमानी ने 91.75 लाख की कुल कीमत पर फ्लैट नंबर 1904 बुक किया था और लगभग 8.40 लाख का भुगतान किया था. सागर करमानी ने 90.71 लाख की कीमत वाला फ्लैट नंबर 1204 बुक किया था और लगभग 8.31 लाख का भुगतान किया था. खरीदाराें ने दावा किया कि उन्हें सितंबर 2026 तक पजेशन का आश्वासन दिया गया था. उन्हाेंने बाद में आराेप लगाया कि जब उन्हाेंने फ्लैट बुक किए थे, तब 8वीं मंजिल से ऊपर के निर्माण के लिए आवश्यक स्वीकृतियां (एप्रुवल्स) उपलब्ध नहीं थीं और वे केवल 25 जुलाई 2025 काे प्राप्त हुई थीं.
 
उन्हाेंने निर्माण की गति और प्राेजेक्ट के मनपा के पानी के कनेक्शन पर भी चिंता जताई. उनकी शिकायताें के अनुसार, प्रमाेटर के फाइनेंस चैनल के माध्यम से हाउसिंग फाइनेंस प्राप्त करने में आई कठिनाइयाें के कारण आखिरकार उन्हें प्राेजेक्ट से हटना पड़ा. उन्हाेंने रेरा ब्याज, मानसिक प्रताड़ना के मुआवजे और मुकदमेबाजी के खर्च के साथ पूरा रिफंड मांगा था. लाेढ़ा ने इन दावाें का विराेध करते हुए तर्क दिया कि दाेनाें ग्राहकाें ने अपनी वित्तीय मजबूरियाें के कारण स्वेच्छा से अपनी बुकिंग रद्द की थी. डेवलपर ने बुकिंग आवेदन की शर्ताें का हवाला दिया, जिसके बारे में उसका दावा था कि वह बुकिंग राशि या विचार (कंसीडरेशन) का 10 प्रतिशत, जाे भी अधिक हाे, जब्त करने की अनुमति देती है. लेकिन महारेरा के समक्ष, डेवलपर महारेरा के आदेशाें के अनुरूप 2 प्रतिशत कटाैती के बाद राशि वापस करने पर सहमत हाे गया.