माेशी, 11 सितंबर (आ.प्र.) मनपा के माेशी कचरा डिपाे में हुए हादसे काे दाे महीने बीत जाने के बाद भी प्रशासन शहर के कचरा संकट काे सुलझाने में विफल रहा है. आयुक्त डाॅ. विजय सूर्यवंशी ने घाेषणा की थी कि अब माेशी में कचरा नहीं डाला जाएगा और शहर के 10 क्षेत्रीय कार्यालयाें के अधिकार क्षेत्र में कचरा प्राेसेसिंग केंद्र स्थापित किए जाएंगे. उन्हाेंने सभागृह में यह आश्वासन भी दिया था कि इसके लिए 8 दिनाें के भीतर जगहाें की घाेषणा कर दी जाएगी. लेकिन, आयुक्त की घाेषणा हवा में ही गायब हाे गई है, ऐसे में यह सवाल नागरिकाें द्वारा उठाया जा रहा है कि प्रशासन कचरे जैसी गंभीर समस्या काे लेकर गंभीर है भी या नहीं.
मनपा के माेशी कचरा डिपाे में स्थित वेस्ट टू एनर्जी (कचरे से ऊर्जा) परियाेजना की अवैध प्रशासनिक बिल्डिंग ढहने से जुलाई में 9 कर्मचारियाें की माैत हाे गई थी. इस हादसे के बाद पूरे शहर में कचरे की बेहद गंभीर समस्या पैदा हाे गई है. माेशी हादसे काे दाे महीने बीत जाने के बाद भी शहर में कचरे की समस्या हल नहीं हुई है. इसे लेकर आयुक्त डाॅ. सूर्यवंशी और उनके प्रशासन पर ठाेस और कड़े कदम न उठाने के आराेप लगने लगे हैं. पूरे शहर का डाेर-टू-डाेर कचरा इकट्ठा कर माेशी स्थित 81 एकड़ के डिपाे में डाला जा रहा है. पिछले 40 सालाें से माेशी क्षेत्र में कचरा डाला जा रहा है, जिससे इस डिपाे की क्षमता समाप्त हाे चुकी है.
वर्तमान में शहर में प्रतिदिन 1,500 टन गीला और सूखा कचरा निकल रहा है. माेशी में कचरे के बढ़ते पहाड़ाें के कारण 8 जुलाई काे हादसा हुआ था, जिसमें 9 मजदूराें की जान चली गई थी. इस क्षेत्र के नगरसेवकाें ने कचरा डालने का लगातार विराेध करना शुरू कर दिया है. इसके बावजूद, अभी भी पूरे शहर का कचरा माेशी में ही डाला जा रहा है. पिछले चार महीनाें से वेस्ट टू एनर्जी प्राेजेक्ट बंद पड़ा है. बायाे-माइनिंग के जरिए कचरा निपटारे का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है, जिससे कचरे का ढेर दिन-ब-दिन बढ़ता ही जा रहा है. दाे महीने बाद भी कचरा प्राेसेसिंग केंद्र नहीं बनाए माेशी हादसे के बाद मनपा प्रशासन हड़बड़ा कर जागा.
इसके बाद शहर के दस क्षेत्रीय कार्यालयाें में एक-एक कर कुल दस कचरा प्राेसेसिंग केंद्र शुरू करने का निर्णय लिया गया. इसके लिए जगहाें का निरीक्षण कर 12 स्थान तय भी किए गए. हालांकि, दाे महीने बीत जाने के बाद भी अभी तक एक भी केंद्र के लिए जगह की घाेषणा नहीं की गई है और न ही काेई केंद्र शुरू किया गया है. नतीजतन, आयुक्त की घाेषणा हवा में ही विलीन हाे गई.
वैकल्पिक डिपाे काे लेकर सत्ताधारियाें ने साधा माैन पूरे शहर का कचरा माेशी कचरा डिपाे में लाकर डाला जाता है. उस डिपाे की क्षमता दस साल पहले ही खत्म हाे चुकी है, इसीलिए शहर में पुनावले स्थित वन विभाग की जमीन पर वैकल्पिक कचरा डिपाे का आरक्षण रखा गया था. मनपा द्वारा अप्रैल 2025 में प्रकाशित प्रारूप संशाेधित विकास याेजना में इस कचरा डिपाे का आरक्षण दिखाई नहीं दे रहा है. शहर के इस वैकल्पिक डिपाे काे लेकर सत्ताधारियाें समेत प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है.