'क्यूआर कोड' तैयार न होने से छात्र स्कूली सामग्री से वंचित

प्रशासन की लापरवाही के कारण कॉन्ट्रैक्टर स्कूल बैग, कॉपियां, रेनकोट और जूते जैसी सामग्रियां नहीं दे सके

    12-Sep-2026
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पिंपरी, 11 सितंबर (आ.प्र.)
शैक्षणिक वर्ष शुरू हुए तीन महीने बीत जाने के बाद भी मनपा के स्कूलाें के लगभग 60 हजार छात्राें काे स्कूल बैग, काॅपियां, रेनकाेट और जूते जैसी सामग्रियां नहीं मिली हैं. प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के बजाय काॅन्ट्रै्नटर के माध्यम से सामग्री आपूर्ति का निर्णय लेने के बाद भी वितरण अधर में लटकने से प्रशासन के नियाेजन पर सवाल खड़े हाे रहे हैं. प्रशासन की ओर से कारण बताया गया है कि ‘क्यूआर काेड’ तैयार न हाेने की वजह से काॅन्ट्रै्नटराें काे सामग्री दे पाना संभव नहीं हाे सका है.
 
मनपा के स्कूलाें में पढ़ने वाले अधिकांश छात्र आर्थिक रूप से कमजाेर परिवाराें से हैं. इसलिए स्कूल शुरू हाेते ही काॅपियां, बैग, यूनिफाॅर्म से जुड़ी सामग्री, रेनकाेट और जूते मिलना बेहद जरूरी हाेता है. हालांकि, मनपा की ओर से इस साल भी इन सामग्रियाें के वितरण में देरी हुई है. सरकार ने इन सामग्रियाें के पैसे सीधे छात्राें के बैंक खाताें में भेजने के लिए ‘डीबीटी’ का विकल्प सुझाया था. लेकिन, शिक्षा समिति के आग्रह के बाद मनपा ने काॅन्ट्रै्नटर के जरिए सामग्री आपूर्ति की टेंडर प्रक्रिया चलाई. शैक्षणिक वर्ष 2026-27 के लिए ‘ई- रुपी’ पद्धति से टेंडर निकाला गया. विभिन्न कक्षाओं के लिए सरकार ने 3,100 रुपये से लेकर 4,475 रुपये तक की दरें तय की हैं.
 
बताया जा रहा है कि अतिरिक्त आयुक्त एवं आयुक्त की मंजूरी, टेंडर प्रक्रिया और काॅन्ट्रै्नटराें काे कानूनी प्रक्रिया पूरी कर दी गई है. इसके बावजूद छात्र अभी भी सामग्रियाें से वंचित हैं. कानूनी मंजूरी मिलने के बाद समय पर सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के बजाय मनपा ने ‘क्यूआर काेड’ तैयार करने का काम लंबित रखा. नतीजतन, सभी प्रक्रियाएं पूरी हाेने का दावा करने वाला प्रशासन छात्राें तक प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने में विफल साबित हुआ है.
 
अभिभावकाें द्वारा यह सवाल पूछा जा रहा है कि शैक्षणिक सत्र का एक बड़ा हिस्सा बीत जाने के बाद यदि सामग्री मिलती है, ताे उसका छात्राें काे कितना फायदा हाेगा. सामग्री की आपूर्ति एक वार्षिक और नियाेजित प्रक्रिया हाेने पर भी, प्रतिवर्ष टेंडर, मंजूरी या तकनीकी समस्याओं का बहाना बनाया जाता है. कराेड़ाें रुपये का प्रावधान हाेने के बाद भी गरीब छात्राें काे समय पर बुनियादी शैक्षणिक सामग्री न मिलने से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली की आलाेचना हाे रही है.