कोथरुड, 11 सितंबर (आ. प्र.) श्री वर्धमान सांस्कृतिक प्रतिष्ठान में विराजित गुरुदेव श्री अभिषेक मुनिजी ने कहा कि, अंतगढ़ सूत्र केवल महापुरुषों के चारित्र का वर्णन नहीं करता, बल्कि मनुष्य को अपने जीवन की वास्तविकता पहचानने और आत्मजागरण की दिशा में बढ़ने की प्रेरणा देता है. मनुष्य जीवन दुर्लभ है. इसके साथ अरिहंत भगवंत की वाणी सुनने का अवसर, धर्म के प्रति श्रद्धा और उसके आचरण की भावना मिलना उससे भी दुर्लभ है. इतने पुण्ययोग प्राप्त होने के बावजूद यदि मनुष्य धर्म-ध्यान से नहीं जुड़ता और जीवन की असारता को नहीं समझता, तो यह उसका दुर्भाग्य है. जीवन में प्रतिदिन ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जो संसार की वास्तविकता का बोध कराती हैं. हम कुछ क्षण उनके बारे में सोचते हैं, चर्चा करते हैं और फिर मोह-माया के जाल में उसी तरह उलझ जाते हैं. यही कारण है कि वर्षों तक धर्म सुनने के बावजूद जीवन में अपेक्षित परिवर्तन नहीं आता. अच्छे प्रवचन की प्रशंसा करना पर्याप्त नहीं है, उसे आचरण में उतारना आवश्यक है. हम कहते हैं कि गुरुदेव ने बहुत सुंदर प्रवचन किया, लेकिन धर्म की वास्तविक परीक्षा तब होती है, जब उसके शब्द हमारे विचार और व्यवहार को बदलें. पर्यूषण महापर्व का संदेश यही है कि धर्म केवल श्रवण और चर्चा तक सीमित न रहे, बल्कि हमारे जीवन में आत्मचिंतन, आचरण और परिवर्तन का माध्यम बने.