पश्चिम में हत्याएं बढ़ रही हैं, स्युसाइड बढ़ रहा है, आत्महत्या बढ़ रही है, अपराध बढ़ रहे हैं. उसका कारण यह नहीं है कि पश्चिम अपराधी हाे रहा है. उसका कुल कारण यह है कि पश्चिम के जीवन में इतनी उदासी और ऊब है कि बिना अपराध किए उस ऊब काे ताेड़ने का और काेई उपाय नहीं सूझता है.
अभी मैंने सुना कि अमेरिका में उन्हाेंने एक नया खेल निकाला है. वह खेल बहुत खतरनाक है. और जब सभ्यताएं बहुत ऊब जाती हैं, तब इस तरह के खेल ईजाद करती है. वह खेल है कि दाे काराें काे पूरी शक्ति और तेजी से दाैड़ते हैं और दाेनाें के चाक रास्ते के बीच पर जाे निशान बना हाेता है उस पर रखते हैं. एक इस तरफ से दूसरा दूसरी तरफ से.
पूरी शक्ति से दाैड़ती हुई काराें काे काैन पहले हटा लेता हैएक्सीडेंट के डर से, वह हार जाता है; जाे पहले नहीं हटाता, वह जीत जाता है.
अब अगर साै या एक साै बीस मील की रफ्तार से दाे गाड़ियां आ रही हैं और दाेनाें के चाक एक ही लकीर पर है, ताे प्राणाें काे बड़ा संकट है. काैन पहले हटेगा नीचे! जाे हटेगा वह हार जाएगा. यह सभ्यता बहुत ऊब पर पहुंच गई है. अब जिंदगी काे दांव पर लगाए बिना काेई रस मालूम नहीं पड़ता है.
इसीलिए सभ्यता जब ऊबते हैं, ताे जुआ पैदा हाेता है, शराब पैदा हाेती है, दांव पैदा हाेते हैं. जब काेई समाज बहुत जुआ खेलने लगे ताे समझना चाहिए कि समाज बहुत ऊब गया है. अब बिना दांव पर लगाए, खतरे में पड़े, उसे काेई रास्ता नहीं मालूम पड़ता जिससे कुछ नई बात हाेने की संभावना पैदा हाे जाए.
मन की दुनिया में चीजें राेज ऊब जाती हैैं. और मन एक क्षण से ज्यादा किसी सुख काे अनुभव काे अनुभव नहीं कर पाता. एक क्षण बीता और सुख दुख हाे जाता है. शरीर के तल पर काेई दुख नहीं है, काेई सुख नहीं है, कष्ट का अभाव है. मन के तल पर सुख हाेते हैं, लेकिन बिलकुल क्षणिक हाेते हैं और एक क्षण में ही डूब जाते हैं और समाप्त हाे जाते हैं. इसीलिए ताे जिस चीज काे पाने के लिए हम बिलकुल पागल हाेते हैं कि सब कुछ लगा देंगे, वह मुठ्ठी में आ जाए, हम एकदम उदास हाे जाएंगे.आप एक बहुत बढ़िया मकान खरीदना चाहते हैं.
खरद लें, और िफर अचानक पाएंगे कि सब खत्म हाे गई बात. वह पुलक, वह दाैड़ वह तेजी, वह खुशी जाे पाने की खाेज में थी वह गई, मिलते ही गई.