कोथरुड, 12 सितंबर (आ. प्र.) श्री वर्धमान सांस्कृतिक प्रतिष्ठान में विराजित गुरुदेव श्री अभिषेक मुनिजी ने कहा कि, इन आध्यात्मिक पर्वों का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं, बल्कि जीवन से बुराइयों को दूर कर सद्गुणों की वृद्धि करना है. पर्यूषण हमें प्रमाद का त्याग, त्याग-प्रत्याख्यान और आत्म-जागरण की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है. मानव जीवन मिला है आत्मकल्याण के लिए. सौभाग्य से प्राप्त मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है और इसी जीवन में त्यागप्रत् याख्यान जैसे आध्यात्मिक पर्वों की आराधना करने का अवसर मिलता है. जब तक भीतर संतोष और त्याग का भाव जागृत नहीं होता, तब तक इच्छाओं की दौड़ समाप्त नहीं होती. जब तक आत्मा का संबंध सम्यक दर्शन से नहीं जुड़ता, तब तक कर्मों का बंधन चलता रहता है. पर्यूषण केवल कुछ दिनों का पर्व नहीं, बल्कि जीवन की दिशा बदलने का अवसर है.