पुणे, 12 सितंबर (आ.प्र.) पेशवेकालीन सरदार मुजूमदार गणेशोत्सव शनिवार (12 सितंबर) को भाद्रपद शुद्ध प्रतिपदा के शुभ मुहूर्त पर प्रारंभ हुआ. ऋषिपंचमी तक चलने वाले इस उत्सव में हर दिन परंपरा के अनुसार धार्मिक कार्यक्रम होंगे. हर दिन शाम को कीर्तन सेवा भी होगी. 1714 में शुरू हुए इस गणेशोत्सव का यह 313वां वर्ष है. शनिवार को सुबह ब्रह्मवृंदों द्वारा वल्लभेष गणपति की पंचधातु की मूर्ति का विधिवत अभिषेक किया गया. ब्रह्मणस्पतिसूक्त, लघुरुद्र और अथर्वशीर्ष के आवर्तन हुए और गणेश भक्तों की उपस्थिति में मयूरासन पर वल्लभेष गणपति की स्थापना की गई. श्री की मूर्ति पंचधातु से बनी है और उसके दस भुजाएं हैं. गणपति के साथ वल्लभा भी हैं. ऋषिपंचमी तक हर शाम 5 से 7 बजे के बीच श्री के सामने कीर्तन सेवा होगी. शनिवार को श्रेयसबुवा बड़वे का कीर्तन हुआ. भाद्रपद शुद्ध द्वितीया, यानी रविवार (13 सितंबर) को शाम को वासुदेवबुवा बुरसे का कीर्तन होगा. इस साल भाद्रपद शुद्ध तृतीया और चतुर्थी एक ही दिन हैं. सोमवार (14 सितंबर) को सुहास बुवा देशपांडे शाम को कीर्तन करेंगे. यह उत्सव मंगलवार (15 सितंबर) को ऋषिपंचमी के दिन तीर्थ प्रसाद के कीर्तन के साथ समाप्त होगा. वासुदेव बुवा बुरसे शाम 5 से 7 बजे तक कीर्तन करेंगे. उसी दिन रात 8 से 10 बजे तक सुहास बुवा देशपांडे के कीर्तन के साथ उत्सव की समाप्ति होगी. डॉ. प्रमोद गायकवाड़ हर सुबह 9 बजे शहनाई वादन करेंगे. योगेश देशपांडे तबले पर और साहिल पुंडलिक हार्मोनियम पर शाम की कीर्तन सेवा में संगत करेंगे.अनुपमा मुजूमदार ने बताया कि सरदार मुजूमदार गणेशोत्सव 1714 में शुरू हुआ था. पहले भी कई बड़े गायकों ने श्री के सामने अपनी गायन सेवा प्रस्तुत की है.