बिबवेवाड़ी, 12 सितंबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) पर्यूषण महापर्व के पांचवें दिन शनिवार (12 सितंबर) को भगवान महावीर जन्म कल्याणक महोत्सव श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक भावना के साथ मनाया गया. बिबवेवाड़ी श्री संघ की धर्मसभा में भगवान महावीर के जीवन चरित्र, त्याग, तप, साहस, सहनशीलता और आत्मबल का वर्णन करते हुए वर्तमान पीढ़ी के माता- पिता को संस्कारों का महत्वपूर्ण संदेश दिया गया. साध्वी श्री दिवाकर ज्योति, राजस्थान वीरांगना, मेवाड़ चंद्रिका, शासन सूर्या, श्री जय श्री जी महाराज साहब ने प्रवचन में कहा कि, प्रत्येक माता-पिता की यह इच्छा होती है कि उनकी संतान महावीर जैसी बने. हालांकि, यदि महावीर जैसी संतान गढ़नी है, तो सबसे पहले घर में त्रिशला और सिद्धार्थ जैसे संस्कारवान माता-पिता तैयार होने चाहिए. संतान केवल शिक्षा और प्रतिस्पर्धा से महान नहीं बनती, बल्कि उसके व्यक्तित्व का निर्माण घर के माहौल, माता-पिता के आचरण और उनके दिए गए संस्कारों से होता है. उन्होंने कहा, बच्चों को हर परिस्थिति से बचाना नहीं, बल्कि हर परिस्थिति का सामना करने में सक्षम बनाना आवश्यक है. भगवान महावीर के जीवन में कई कष्ट और कठिन अवसर आए, लेकिन उनका आत्मबल कभी नहीं डिगा. श्री राम को वनवास मिला, पांडवों ने बनवास सहन किया और महाराणा प्रताप ने भी अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताया; लेकिन उन्होंने परिस्थिति के सामने हार नहीं मानी. बच्चों के चेहरे की मुस्कान छीनकर उन्हें केवल सफलता की दौड़ में आगे बढ़ाना सही नहीं है. सफलता से पहले उन्हें जीवन जीना, असफलता को स्वीकार करना और फिर से नए सिरे से खड़े होना सिखाना बेहद आवश्यक है.