अब जॉइंट रिप्लेसमेंट में टांकों की चिंता नहीं !

रोबोटिक ‌‘स्टिचलेस‌’ तकनीक से सटीक सर्जरी के साथ घाव की देखभाल और रिकवरी को बनाया जा रहा अधिक सहज

    13-Sep-2026
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डॉ. नीरज आडकर
चीफ रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट और
स्पोर्ट्स इंजरी सर्जन
चेयरमैन, साईश्री विटालाइफ हॉस्पिटल>
 

रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट एवं स्पोर्ट्स इंजरी सर्जन डॉ. नीरज आडकर के अनुसार, आज मरीज केवल सफल जॉइंट रिप्लेसमेंट नहीं चाहते, बल्कि सर्जरी से लेकर सामान्य जीवन में वापस लौटने तक का सफर अधिक सहज चाहते हैं. रोबोटिक तकनीक सर्जरी में सटीकता हासिल करने में मदद करती है, जबकि स्टिचलेस क्लोजर घाव की देखभाल और रिकवरी को मरीज के लिए आसान बना सकता है. उद्देश्य आधुनिक जॉइंट रिप्लेसमेंट को केवल सटीक ही नहीं, बल्कि अधिक मरीज-केंद्रित बनाना है.  
 
घुटने और कूल्हे के गंभीर दर्द से परेशान मरीजों के लिए जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी सामान्य जीवन की ओर लौटने की नई उम्मीद लेकर आती है. लेकिन सर्जरी का नाम सुनते ही टांकों, जख्म की देखभाल और रिकवरी की लंबी प्रक्रिया को लेकर मरीजों के मन में कई सवाल और चिंताएं पैदा हो जाती हैं. ऐसे में रोबोटिक ‌‘स्टिचलेस‌’ जॉइंट रिप्लेसमेंट आधुनिक चिकित्सा क्षेत्र में मरीजों के लिए एक अधिक सुविधाजनक विकल्प के रूप में उभर रहा है. इस अत्याधुनिक तकनीक में रोबोटिक सिस्टम की सहायता से मरीज की व्यक्तिगत शारीरिक संरचना के अनुसार सर्जरी की योजना तैयार की जाती है. ऑपरेशन के दौरान हड्डी की सटीक तैयारी, इम्प्लांट की सही स्थिति और उचित अलाइनमेंट में रोबोटिक तकनीक सर्जन की सहायता करती है. इससे स्वस्थ ऊतकों को सुरक्षित रखने और रिहैबिलिटेशन को अधिक सुगम बनाने में मदद मिल सकती है. ‌

‘स्टिचलेस‌’ तकनीक क्या बदलती है ?

पारंपरिक जॉइंट रिप्लेसमेंट में बाहरी टांकों या स्टेपल्स के इस्तेमाल के बाद उन्हें निकलवाने के लिए मरीज को अस्पताल वापस जाना पड़ सकता है. ‌‘स्टिचलेस‌’ तकनीक में विशेष वाउंड-क्लोजर तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे पारंपरिक बाहरी टांके या स्टेपल्स निकालने की आवश्यकता नहीं रहती. इससे मरीज के लिए उपचार के बाद का अनुभव अधिक सुविधाजनक हो सकता है.

 रोबोटिक ‌‘स्टिचलेस‌’ जॉइंट रिप्लेसमेंट के प्रमुख फायदे

 सर्जरी में अधिक सटीकता : मरीज की शारीरिक संरचना के अनुसार सर्जरी की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में रोबोटिक तकनीक सहायता करती है.
कम से कम आक्रामक प्रक्रिया : छोटे चीरे और ऊतकों की सावधानीपूर्वक हैंडलिंग से सर्जिकल ट्रॉमा को कम करने में मदद मिल सकती है.
टांके निकलवाने की जरूरत नहीं : पारंपरिक बाहरी टांकों या स्टेपल्स को निकलवाने से जुड़ी असुविधा और चिंता से बचा जा सकता है.
घाव की देखभाल आसान : बंद किए गए चीरे की पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल अधिक सुविधाजनक हो सकती है.
जल्दी नहाने की संभावना : उचित वाउंड क्लोजर और सर्जन की सलाह के अनुसार मरीज डिस्चार्ज के बाद अपेक्षाकृत जल्दी नहा सकते हैं.
रिहैबिलिटेशन में मदद : कम ऊतक क्षति और व्यवस्थित फिजियोथेरेपी के साथ मरीजों को चलने-फिरने तथा रिहैबिलिटेशन की प्रक्रिया पहले शुरू करने में मदद मिल सकती है.
मरीज का बेहतर अनुभव : रोबोटिक सटीकता और आसान वाउंड केयर का संयोजन पूरी उपचार प्रक्रिया को अधिक आरामदायक और कम तनावपूर्ण बनाने में मदद कर सकता है.

हर मरीज के लिए उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं

विशेषज्ञों के अनुसार, स्टिचलेस रोबोटिक जॉइंट रिप्लेसमेंट के कई संभावित फायदे हैं, लेकिन यह तकनीक प्रत्येक मरीज के लिए उपयुक्त हो, यह आवश्यक नहीं है. मरीज की शारीरिक संरचना, व्यक्तिगत स्थिति और सर्जन के चिकित्सकीय आकलन के आधार पर इस तकनीक की उपयुक्तता तय की जाती है.

निष्कर्षतः, जॉइंट रिप्लेसमेंट के क्षेत्र में रोबोटिक तकनीक और स्टिचलेस वाउंड- क्लोजर का संयोजन सर्जरी के साथ-साथ मरीज के रिकवरी अनुभव को भी अधिक सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक आधुनिक कदम माना जा रहा है.