‌‘सुरक्षित मातृत्व‌’ बड़ी जिम्मेदारी : सुनेत्रा पवार

सिम्बायोसिस द्वारा शुरू किए ‌‘माहेरवाशीण‌’ पहल की प्रशंसा करते हुए डिप्टी सीएम ने कहा

    14-Sep-2026
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लवले, 13 सितंबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

सिम्बायोसिस यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर (SUHRC) ने सिम्बायोसिस मेडिकल कॉलेज फॉर विमेन (SMCW) के साथ मिलकर ‌‘माहेरवाशीण रीइमेजिनिंग मैटरनिटी केयर‌’ (मातृत्व देखभाल की नई सोच) नाम से एक अनूठी पहल शुरू की है. इस संवेदनशील पहल का उद्देश्य गरिमा, करुणा और मानसिक स्वास्थ्य को मातृत्व देखभाल के केंद्र में रखकर प्रसव के अनुभव को अधिक सुरक्षित और सुखद बनाना है. कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार और विधायक शंकर मांडेकर द्वारा गर्भवती माताओं के लिए आधिकारिक ‌‘माहेरवाशीण‌’ सूचना पुस्तिका का विमोचन किया गया. साथ ही इस कार्यक्रम में मातृ स्वास्थ्य सेवा में योगदान और जुड़ाव के लिए स्वास्थ्य पेशेवरों और लाभार्थी माताओं को भी सम्मानित किया गया. यह कार्यक्रम सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी की कुलाधिपति डॉ. विद्या येरवडेकर, कुलपति डॉ. आर. रमन, फैकल्टी ऑफ मेडिकल एंड हेल्थ साइंसेस के प्रोवोस्ट डॉ. राजीव येरवडेकर और अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में आयोजित हुआ. कार्यक्रम की अध्यक्षता सिम्बायोसिस के संस्थापक और अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) एस.बी. मुजुमदार ने की. इस अवसर पर सुनेत्रा पवार ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षित मातृत्व केवल स्वास्थ्य से जुड़ी चिंता नहीं, बल्कि एक सामाजिक जिरमेदारी है. उन्होंने सिम्बायोसिस की सराहना करते हुए कहा उसने एक ऐसा मॉडल तैयार किया है जो चिकित्सा उत्कृष्टता को करुणा, गरिमा और अपनत्व की भावना के साथ जोड़ता है. उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ बनाने के महत्व पर बल दिया और इन पहलों को महिलाओं और परिवारों तक पहुंचाने में जमीनी स्तर के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भूमिका की सराहना की. चार मुख्य स्तंभों पर आधारित है पहल : माहेरवाशीण पहल की परिकल्पना डॉ. राजीव येरवडेकर ने की है, अस्पताल को एक ‌‘मायके‌’ के रूप में देखती है, जहां हर गर्भवती महिला को केवल एक मरीज न मानकर एक ‌‘माहेरवाशीण‌’- यानी अपने मायके लौटी बेटी की तरह माना जाता है. यह पहल चार मुख्य स्तंभों पर आधारित है, जिनमें घर जैसा अपनत्व, पोषण, संस्कृति तथा शिशु एवं प्रसवोत्तर देखभाल का समावेश है.  
 
आशा कार्यकर्ता होंगी ‌‘माहेर- दूत‌’ के रूप में प्रशिक्षित

 बताया गया कि यह पहल ‌‘प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान‌’ और ‌‘जननी सुरक्षा योजना‌’ जैसे सरकारी कार्यक्रमों को पूरा करती है. इस कार्यक्रम के तहत, जमीनी स्तर की आशा कार्यकर्ताओं को ‌‘माहेर-दूत‌’ के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, जो समुदायों तक जागरूकता और ममतामयी मातृत्व सहायता पहुंचाने में मदद करेंगी. एनएमसी फैमिली एडॉप्शन प्रोग्राम के साथ इसका जुड़ाव भविष्य के डॉक्टरों में सहानुभूति और मरीज-केंद्रित देखभाल की भावना विकसित करने में भी मदद करेगा.