पुणे, 14 सितंबर (आ.प्र.)कैंसर जैसी घातक बीमारी की शुरुआती पहचान अब बेहद आसान व सुरक्षित हो सकती है. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT) पुणे के शोधकर्ता एक ऐसी अत्याधुनिक तकनीक पर काम कर रहे हैं, जो कम लागत और बिना किसी हानिकारक रेडिएशन के ब्रेस्ट कैंसर का पता लगाने में सक्षम है. इस तकनीक को भविष्य में ‘स्मार्ट ब्रा’ जैसे पहनने योग्य उपकरण के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे महिलाओं को नियमित जांच के लिए बड़े अस्पतालों या भारी मशीनों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. इस शोध का नेतृत्व IIIT पुणे के इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्यूनिकेशन इंजीनियरिंग विभाग की सहायक प्रोफेसर डॉ. दिव्या चतुर्वेदी कर रही हैं. यह तकनीक ‘नॉनआय नाइजिंग इलेक्ट्रोमैग्नेटिक’ तरंगों और माइक्रोवेव इमेजिंग सिद्धांत पर काम करती है. मानव शरीर में स्वस्थ और ट्यूमर वाले ऊतकों (टिश्यूज) के इलेक्ट्रोमैग्नेटिक गुण अलग-अलग होते हैं. यह तकनीक इसी अंतर को पहचानकर ट्यूमर की सटीक स्थिति का पता लगाती है. ‘IEEE सेंसर जर्नल’ में प्रकाशित इस शोध ने अपनी शुरुआती अवधारणा को सफलतापूर्वक साबित कर दिया है. प्रयोगशाला परीक्षणों के दौरान शोधकर्ताओं ने आठ-विवाल्डी- एंटीना एरे का उपयोग करके स्वस्थ और ट्यूमर प्रभावित ऊतकों के मॉडल से डेटा एकत्र किया. इसके बाद कन्फोकल माइक्रोवेव इमेजिंग एल्गोरिदम के माध्यम से ट्यूमर की सटीक स्थिति के इमेज तैयार किए गए. शोध टीम का लक्ष्य अब इस पूरी प्रणाली को माइक्रो-चिप पर एकीकृत करना है, ताकि उपकरण का आकार बेहद छोटा और हल्का हो सके. पारंपरिक तकनीकों से ज्यादा सुरक्षित व किफायती ः वर्तमान में ब्रेस्ट कैंसर की जांच के लिए मुख्य रूप से मैमोग्राफी, अल्ट्रासाउंड और एमआरआई का सहारा लिया जाता है. मैमोग्राफी में इस्तेमाल होने वाला रेडिएशन शरीर के लिए पूरी तरह से जोखिम-मुक्त नहीं होता, जबकि एमआरआई की प्रक्रिया काफी महंगी होती है और इसके लिए विशेष बुनियादी ढांचे की आवश्यकता पड़ती है. इसके विपरीत, माइक्रोवेव तकनीक पूरी तरह से रेडिएशन- मुक्त है, जो मरीजों को बिना किसी दुष्प्रभाव के बार-बार जांच और नियमित निगरानी की सुविधा प्रदान करती है. करोडों जिंदगियां बचाने में मददगार साबित होगी तकनीक ः कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार, रेडिएशन-मुक्त ‘स्मार्ट ब्रा’ की अवधारणा भविष्य के चिकित्सा क्षेत्र के लिए बेहद रोमांचक है. यह मैमोग्राफी का विकल्प बनने के बजाय उसकी एक सहयोगी तकनीक के रूप में उभर सकती है. विशेषकर घने स्तन (डेंस ब्रेस्ट) वाली महिलाओं के लिए या ऐसे दूरदराज के इलाकों में जहां आधुनिक अस्पतालों की पहुंच कम है, यह तकनीक शुरुआती चरण में ही कैंसर का पता लगाकर अनगिनत जिंदगियां बचाने में मददगार साबित होगी.