मुंबई, 16 सितंबर (आ.प्र.)
त्याेहारी माैसम से ठीक पहले भारतीय मानक ब्यूराे (बीआईएस) ने साेने और चांदी के आभूषणाें पर हाॅलमार्किंग शुल्क बढ़ा दिया है. साेने के लिए यह शुल्क 45 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये कर दिया गया है, जाे करीब 67 फीसदी की वृद्धि है. हालांकि, चांदी के आभूषणाें के लिए शुल्क 35 रुपये प्रति वस्तु पर बरकरार रखा गया है.
इस तत्काल प्रभाव से लागू हुए फैसले पर आभूषण उद्याेग ने चिंता जताई है. यह वृद्धि 14 सितंबर, 2026 काे जारी बीआईएस (हाॅलमार्किंग) संशाेधन विनियम, 2026 के माध्यम से अधिसूचित की गई है.
संशाेधित अनुसूची खत के तहत, ज्वैलर्स काे प्रति वस्तु 75 रुपये का हाॅलमार्किंग शुल्क देना हाेगा. प्रत्येक खेप के लिए न्यूनतम शुल्क 200 रुपये निर्धारित किया गया है.
चांदी की वस्तुओं के लिए, ज्वेलर्स काे मान्यता प्राप्त परख और हाॅलमार्किंग केंद्राें (एएचसी) काे प्रति वस्तु 35 रुपये का शुल्क देना हाेगा. चांदी के लिए प्रति खेप न्यूनतम शुल्क 150 रुपये तय किया है.
बीआईएस हाॅलमार्किंग आभूषणाें में उपयाेग की जाने वाली कीमती धातु की शुद्धता काे सत्यापित करती है. यह बीआईएस के तहत वस्तु काे प्रमाणित करती है. इसमें तीन मुख्य निशान हाेते हैं: बीआईएस लाेगाे, कैरेट या मिलिसीमल शुद्धता, और छह अंकाें का अल्फान्यूमेरिक काेड जिसे हाॅलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन (एचयूआईडी) नंबर कहते हैं. अखिल भारतीय रत्न और आभूषण घरेलू परिषद (जीजेसी) ने इस कदम पर चिंता व्यक्त की है. जीजेसी ने सरकार और बीआईएस से इस निर्णय की तत्काल समीक्षा करने का आग्रह किया है.
जीजेसी के अध्यक्ष राजेश राेकड़े ने कहा उद्याेग ने हमेशा हाॅलमार्किंग का समर्थन किया है. उनका मानना है कि शुद्धता का आश्वासन और उपभाेक्ता विश्वास काराेबार के लिए माैलिक हैं. लेकिन अनिवार्य अनुपालन की लागत में लगभग 67 फीसदी की वृद्धि बिना जांच के नहीं हाेनी चाहिए. राजेश राेकड़े ने सवाल उठाया हाॅलमार्किंग की मात्रा में भारी वृद्धि हुई है. ऐसे में प्रति वस्तु शुल्क 45 रुपये से बढ़ाकर 75 रुपये क्याें किया जा रहा है, यह उद्याेग जानना चाहता है.