कीर्तन परंपरा को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत

वरिष्ठ कीर्तनकार डॉ. चारुदत्त आफले ने ‌‘कीर्तन रत्न‌’ पुरस्कार से सम्मानित होने पर कहा

    17-Sep-2026
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नवी पेठ, 16 सितंबर (आ.प्र.)

वरेिष्ठ कीर्तनकार डॉ. चारुदत्त आफले को पुणे फेस्टिवल की ओर से पत्रकार भवन सभागृह में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में ‌‘कीर्तन रत्न‌’ पुरस्कार से पुणे फेस्टिवल के अध्यक्ष कृष्णकुमार गोयल के हाथों सम्मानित किया गया. इस अवसर पर सम्मानचिन्ह, पुणेरी पगड़ी, शाल, श्रीफल और पुष्पगुच्छ भेंट किए गए. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कीर्तन कलानिधि रामचंद्र भिड़े सहित पुणे फेस्टिवल के ट्रस्टी मोहन टिल्लू व निवेदिता मेहेंदले उपस्थित थे. पुरस्कार ग्रहण करते हुए डॉ. आफले ने कहा 27 वर्षों बाद पुणे का यह प्रतिष्ठित पुरस्कार मिलने से उन्हें विशेष खुशी हुई. उन्होंने कीर्तन परंपरा से युवा पीढ़ी को जोड़ने की आवश्यकता जताई और सुझाव दिया कि स्कूलों व कॉलेजों में कीर्तन का प्रशिक्षण देने की योजना बनाई जानी चाहिए. जेन जी पीढ़ी के केवल आलोचनात्मक विश्लेषण के बजाय उन्हें समझकर आगे बढ़ने की जरूरत है. कृष्णकुमार गोयल ने कहा कीर्तन समाज को शिक्षा और संस्कार देने वाली एक प्रभावी कला है. कार्यक्रम में रामचंद्र भिडे ने फेस्टिवल के 38 वर्षों की सफल यात्रा की सराहना की. कार्यक्रम की शुरुआत तन्मयी मेहेंदले-कुलकर्णी की नांदी से हुई. निवेदिता मेहेंदले ने श्री गणेश उपासना कीर्तन के तहत पाली के बल्लाल गणपति की कथा प्रस्तुत की. ओंकार जोशी ने तबले और साहिल पुंडलिक ने संवादिनी पर संगत की. कार्यक्रम का संचालन सचिन आडेकर और आभार प्रदर्शन तन्मयी मेहेंदले-कुलकर्णी ने किया.