-ध्यानविधि : अपने शरीर को भीतर के केंद्र से देखो

    18-Sep-2026
Total Views |

Osho 
जब भी तुम्हें समय हाे और यह करना सरल लगे, तब आंखें बंद कर लाे और फिर भीतर से आंखाें की सारी हलन-चलन काे राेक लाे.
 
काेई गति मत हाेने दाे. इसका अनुभव कराे. आखाें की सभी गतियां राेक लाे.अनुभव कराे जैसे कि तुम पाषाणवत हाे गए हाे, फिर तुम आंखाें की उस पाषाणवत दशा में बने रहे. कुछ भी मत कराे; बस रूके रहाे. अचानक एक दिन तुम्हें बाेध हाेगा कि तुम स्वयं के भीतर देख रहे हाे. तुमने अपने शरीर काे केवल बाहर से देखा है. तुमने अपने शरीर काे एक दर्पण में प्रतिफलित हाेते देखा है, या तुमने हाथाें काे बाहर से देखा है. तुम नहीं जानते कि तुम्हारे शरीर का भीतरी रूप ्नया है. तुमने कभी अपने भीतर प्रवेश नहीं किया है.
 
तुम कभी अपनी अंतस-सत्ता में और अपने शरीर के भीतर नहीं हुए हाे ताकि तुम वहां से चाराें ओर देख सकाे कि वह भीतर से कैसा दिखता है. अपनी आंखें बंद कर लाे, अपने अंतर्जगत काे सविस्तार से देखाे और भीतर से प्रत्येक अंग पर गति कराे.
 
पैर के अंगूठे पर भीतर से दृष्टि ले जाओ. पूरे शरीर काे भूल जाओ; अंगूठे पर जाओ. वहां ठहराे और देखाे. फिर पैराें में गति कराे, ऊपर की ओर चलाे; पैराें के प्रत्येक हिस्से से गुजराे.
 
अपने अंतरंग काे विस्तार से देखाे. इस विधि का प्रथम और बाहरी हिस्सा है कि तुम अपने शरीर काे भीतर के केंद्र से देखाे. भीतर मध्य में खड़े रह कर चाराें ओर देखाे. तुम शरीर से अलग हाे जाओगे क्योंकि देखने वाला कभी भी देखी गई वस्तु नहीं रह जाता.
 
अवलाेकन-कर्ता अवलाेकित-वस्तु से अलग है. यहि तुम भीतर से अपने शरीर काे पूरी तरह से देख सकाे, फिर तुम कभी भी इस भ्रांति में नहीं पड़ सकते कि तुम शरीर हाे. तब तुम भिन्न बने रहाेगे, पूर्णतः भिन्न-शरीर के भीतर, लेकिन शरीर नहीं. यह इस विधि का पहला हिस्सा है. तब तुम गति कर सकते हाे, तब तुम गति करने के लिए मुक्त हुए. एक बार शरीर से मुक्त हाे कर, अब तुम अपने मन में गहरे में गति कर सकते हाे.