पुणे, 17 सितंबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
राज्य के सभी अधिसूचित साइलेंस जाेन में ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमाें का सख्ती से पालन कराने और नियमाें का उल्लंघन करने वालाें पर की गई कार्रवाई का रिकाॅर्ड रखने का निर्देश नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने महाराष्ट्र गृह विभाग और पुलिस महानिदेशक काे दिया है. एनजीटी की पुणे स्थित पश्चिमी क्षेत्रीय पीठ के न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य डाॅ. सुजीत कुमार बाजपेयी ने 10 सितंबर काे यह आदेश दिया.
यह निर्देश इससे पहले दिए गए एक आदेश के संदर्भ में है. पुणे की ऑडियाेलाॅजिस्ट डाॅ. कल्याणी मांडके और अन्य लाेगाें ने वकील मैत्रेय पी. घाेरपड़े के माध्यम से अक्टूबर 2025 में यह मामला दर्ज कराया था.
10 सितंबर काे हुई सुनवाई के दाैरान, याचिकाकर्ताओं ने ध्वनि प्रदूषण (विनियमन और नियंत्रण) नियम, 2000 के नियम 6 काे सख्ती से लागू करने की मांग की. इस नियम में शांत क्षेत्राें में प्रतिबंधित गतिविधियाें के लिए सजा का प्रावधान है. इसमें संगीत बजाना, ध्वनि वर्धक (एम्पलीफायराें) का उपयाेग करना, ढाेल बजाना, हाॅर्न या तुरही बजाना, तेज आवाज वाले पटाखे फाेड़ना, भीड़ जुटाने के उद्देश्य से लाउडस्पीकर या सार्वजनिक घाेषणा प्रणाली का उपयाेग करना शामिल है. याचिकाकर्ताओं ने ट्रिब्यूनल से अनुराेध किया कि पुलिस महानिदेशक काे पूरे राज्य में इस नियम काे लागू करने का निर्देश दिया जाए.
राज्य गृह विभाग और पुलिस महानिदेशक की ओर से पुणे के पुलिस उपायुक्त (क्राइम ब्रांच) गाैहर हसन व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए. नियम 6 का कड़ाई से पालन करने का निर्देश देने के संबंध में काेई आपत्ति है क्या, ऐसा पीठ द्वारा पूछे जाने पर उन्हाेंने कहा काेई आपत्ति नहीं है. इसके बाद पीठ ने गृह विभाग और पुलिस महानिदेशक काे निर्देश दिया कि महाराष्ट्र के प्रत्येक साइलेंस जाेन में इस नियम का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए. साथ ही, निर्देश दिए जाने पर कार्रवाई का रिकाॅर्ड ट्रिब्यूनल के समक्ष प्रस्तुत करना भी संबंधित अधिकारियाें के लिए अनिवार्य हाेगा.
नगर विकास विभाग ने अधिकरण काे सूचित किया कि ध्वनि प्रदूषण नियमाें काे लागू करने के लिए राज्य सरकार ने नवंबर 2017 में ही दिशा-निर्देश जारी किए थे.
स्थानीय अधिकारियाें द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत करने और सरकार की मंजूरी मिलने के बाद ही साइलेंस जाेन अधिसूचित किए जाते हैं. अब तक 28 मनपाओं के प्रस्तावाें के आधार पर साइलेंस जाेन अधिसूचित किए जा चुके हैं. इस मामले की याचिकाकर्ता डाॅ. कल्याणी मांडके ने कहा, यह एक सकारात्मक कदम है.
ये क्षेत्र बहुत पहले ही निर्धारित किए गए थे और नियम भी अस्तित्व में थे, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया गया. लेकिन मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में हमें सकारात्मक बदलाव देखने काे मिलेंगे.