एन. चंद्रशेखरन को मिला 5 साल का एक्सटेंशन

टाटा संस बोर्ड का बड़ा फैसला : आईपीओ की प्रक्रिया भी शुरू, जमशेदपुर में उत्सव का माहौल

    18-Sep-2026
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मुंबई/जमशेदपुर, 17 सितंबर (आ.प्र.)

टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी ‌‘टाटा संस‌’ के बोर्ड ने गुरुवार को एन. चंद्रशेखरन को एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के रूप में अगले पांच वर्षों के लिए नया कार्यकाल मंजूर कर दिया है. इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के निर्देशों का पालन करते हुए कंपनी को शेयर बाजार में लिस्ट (आईपीओ) कराने की आधिकारिक प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. वेिशकर्मा पूजा के शुभ अवसर पर आई इस खबर से औद्योगिक नगरी जमशेदपुर में उत्सव का माहौल है. चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना था. पूर्व में उन्होंने संकेत दिया था कि वे अगला कार्यकाल नहीं लेंगे, लेकिन बोर्ड ने समूह के स्थायित्व और विकास को ध्यान में रखते हुए उन्हें फिर से कमान सौंपने का निर्णय लिया. लगभग तीन घंटे चली इस बोर्ड बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने प्रस्ताव पर अपनी असहमति व्यक्त की, परंतु बोर्ड के अन्य सदस्यों ने सर्वसम्मति और बहुमत से इस विस्तार को मंजूरी प्रदान की. एन. चंद्रशेखरन 2017 से टाटा संस के चेयरमैन पद की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. इससे पहले वे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को वैेिशक ऊंचाइयों पर ले जाने में अहम भूमिका निभा चुके हैं. उनके कार्यकाल के दौरान टाटा समूह ने नई तकनीकों, विमानन (एयर इंडिया), डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विस्तार किया है. उनके नेतृत्व में समूह के प्रदर्शन और साख में काफी वृद्धि हुई है. जमशेदपुर के व्यवसायियों, उद्योगपतियों और टाटा वर्कर्स यूनियन के सदस्यों ने इस फैसले पर खुशी जताई है. चंद्रशेखरन का जमशेदपुर से गहरा पारिवारिक रिश्ता है. उनकी पत्नी ललिता चंद्रशेखरन जमशेदपुर की ही बेटी हैं और उनके पिता व दादा टाटा स्टील में वरिष्ठ अधिकारी रहे थे. इसी वजह से स्थानीय लोग उन्हें स्नेह से शहर का दामाद भी कहते हैं. चंद्रशेखरन हर साल ‌‘फाउंडर्स डेफ‌’ पर जमशेदपुर आते हैं और शहर के सामाजिक व औद्योगिक विकास से जुड़े रहते हैं.
 
झारखंड के विकास में योगदान और भावी योजनाएं

टाटा समूह ने चंद्रशेखरन के मार्गदर्शन में झारखंड में औद्योगिक और तकनीकी निवेश को लगातार बढ़ावा दिया है राज्य में एडवांस्ड टेक्नोलॉजी और कौशल विकास के लिए 11,000 करोड़ रुपये के निवेश की घोषणाएं इस प्रतिबद्धता को दर्शाती हैं. कैट (उअखढ) के राष्ट्रीय सचिव सुरेश संथोलिया और अन्य व्यापारिक संगठनों ने कहा कि इस फैसले से टाटा समूह का आंतरिक विवाद समाप्त होगा और जमशेदपुर सहित पूरे देश में टाटा की विभिन्न परियोजनाओं को नई गति और मजबूती मिलेगी.  
 
प्रक्रिया को सुचारू और पारदर्शी तरीके से पूरा करने में मिलेगी मदद

 टाटा संस को ‌‘अपर लेयर एनबीएफसी‌’ के रूप में वर्गीकृत किए जाने के बाद आरबीआई ने कंपनी के लिए लिस्टिंग अनिवार्य कर दी थी. हालांकि कंपनी ने प्राइवेट लिमिटेड बने रहने के विभिन्न विकल्पों पर विचार किया, लेकिन केंद्रीय बैंक ने नियमों में छूट देने से इनकार कर दिया. एन. चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा समूह को इस ऐतिहासिक आईपीओ प्रक्रिया को सुचारू और पारदर्शी तरीके से पूरा करने में सहूलियत मिलने की उम्मीद है.