तमिलनाडु सरकार हिंदी पढ़ाने से नहीं रोक सकती

मद्रास HC के "नवोदय विद्यालय" खोलने के फैसले को उचित ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा

    18-Sep-2026
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Tamilnadu
नई दिल्ली, 17 सितंबर (विशेष प्रतिनिधि)
तमिलनाडु सरकार हिंदी पढ़ाने से नहीं राेक सकती है. यह टिप्पणी सुप्रीम काेर्ट ने किया. मद्रास हाईकाेर्ट के ‘नवाेदय विद्यालय’ खाेलने के फैसले काे उचित बताते हुए जस्टिस नागरत्ना की बेंच ने कहा- हिंदी काे लेकर राज्य सरकार काे अपनी साेच बदलने की जरूरत है. बेंच ने कहा तमिलनाडु में कुछ नया जुड़ने से वहां का शिक्षा का स्तर कम नहीं हाेगा. नागरत्ना ने कहा- चेन्नई दिल्ली से अलग-अलग नहीं. इस तरह रवैया देश के एकजुट रहने में बाधक बनता है.
 
सुप्रीम काेर्ट ने गुरुवार काे तमिलनाडु सरकार काे निर्देश दिया कि वह जवाहर नवाेदय विद्यालय खाेलने के लिए हर जिले में जमीन की पहचान करने के अपने 15 दिसंबर, 2025 के आदेश का पालन करे. साथ ही काेर्ट ने राज्य और केंद्र से कहा कि वे इन स्कूलाें काे लेकर अपने मतभेदाें काे बातचीत से सुलझाएं.
 
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस ऑगस्टीन जाॅर्ज मसीह की बेंच ने नवाेदय स्कूलाें में अपनाई जाने वाली ‘तीन-भाषा नीति’ का तमिलनाडु द्वारा विराेध किए जाने पर भी सवाल उठाए.
 
बेंच ने कहा कि राज्य काे केंद्र से फंड पाने वाले इन संस्थानाें काे अपनी माैजूदा शिक्षा व्यवस्था के लिए खतरा नहीं मानना चाहिए. इस मामले की सुनवाई 14 दिसंबर काे हाेगी. बता दें, तमिलनाडु ने भाषा काे लेकर चिंता जताई है. यह मामला मद्रास हाई काेर्ट के उस आदेश काे चुनाैती देने से जुड़ा है जिसमें हर जिले में नवाेदय विद्यालय खाेलने काे कहा गया था.
 
नवाेदय स्कूल केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत ‘नवाेदय विद्यालय समिति’ द्वारा चलाए जाने वाले केंद्रीय फंड से चलने वाले रेजिडेंशियल स्कूल हैं.
 
तमिलनाडु ने इनके खुलने का विराेध किया है, जसकी एक वजह यह है कि इन स्कूलाें में तीन- भाषा नीति अपनाई जाती है जिसमें हिंदी शामिल है, जबकि राज्य में दाे-भाषा नीति लागू है. तमिलनाडु की ओर से पेश सीनियर एडवाेकेट जयदीप गुप्ता ने काेर्ट काे बताया कि राज्य काे स्कूलाें या हिंदी पढ़ाने से काेई दिक्कत नहीं है, बल्कि उन्हें नवाेदय याेजना से जुड़ी भाषा नीति पर आपत्ति है. मयह राज्य की नीति के खिलाफ है. यह तमिल भाषा काे पीछे छाेड़ती है. इस तरह का एकीकरण संविधान का मकसद नहीं है. यह केंद्र सरकार का स्कूल नहीं है. यह एक साेसाइटी द्वारा चलाया जाने वाला स्कूल है. इसमें हिंदी काे ही प्रमुखता देने की जिद है. जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि भाषा के मुद्दे पर केंद्र और राज्य के बीच बातचीत हाे सकती है.