पिंपरी, 18 सितंबर
(आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
पिंपरी-चिंचवड़ मनपा ने शहर भर में चल रहे एक सर्वे के दाैरान 17,500 अनधिकृत पानी के कनेक्शनाें का पता लगाया है. इनमें से 13,500 कनेक्शनाें काे नियमित किया जा चुका है और लगभग 26 कराेड़ रुपये की लागत से वाटर मीटर लगाए गए हैं.
नागरिक प्रशासन का अनुमान है कि शहर में 25,000 से अधिक अनधिकृत पानी के कनेक्शन हैं. इस सर्वे, नियमितीकरण और वाटर मीटर लगाने के लिए कुल 32 कराेड़ रुपये का बजट तय किया गया है. पिंपरीचिंचवड़ में लगभग 7.84 लाख पंजीकृत संपत्तियां हैं, जबकि अधिकृत पानी के कनेक्शनाें की संख्या लगभग दाे लाख है.
प्रशासन के अनुसार, हाउसिंग साेसायटियाें में सामान्य पानी के कनेक्शन और बड़ी संख्या में अनधिकृत कनेक्शन, संपत्तियाें की संख्या और पंजीकृत कनेक्शनाें के बीच अंतर की मुख्य वजहाें में से हैं.
मनपा का दावा है कि शहर में आपूर्ति किए जाने वाले पानी का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा रिसाव और चाेरी के कारण व्यर्थ हाे जाता है, जबकि जल शुल्क से मिलने वाला अपेक्षित राजस्व भी प्राप्त नहीं हाे पा रहा है. इन नुकसानाें काे राेकने और राजस्व में सुधार करने के लिए, पीसीएमसी ने अनधिकृत कनेक्शनाें काे नियमित करने के लिए 2023 में एक विशेष अभियान शुरू किया था. इसकी समय-सीमा तीन बार बढ़ाई गई और डिपाजिट राशि की शर्त भी माफ कर दी गई.
लेकिन, इस अभियान काे बहुत कम प्रतिक्रिया मिली और आठ नागरिक क्षेत्राें से केवल 1,673 आवेदन ही प्राप्त हुए. सीमित प्रतिक्रिया काे देखते हुए, जल आपूर्ति विभाग ने अवैध कनेक्शनाें की पहचान करने व मीटर लगाने हेतु एक ठेकेदार नियुक्त करने का निर्णय लिया. 32 कराेड़ रुपये की यह परियाेजना दिसंबर 2024 में शुरू हुई थी और इसकी अवधि 24 महीने तय की गई है.
3 लाख से अधिक संपत्तियाें का सर्वे अब तक 3,07,950 संपत्तियाें का सर्वे किया जा चुका है. इस प्रक्रिया में झुग्गी बस्तियाें और शहर के अन्य हिस्साें में 17,500 अनधिकृत कनेक्शनाें की पहचान की गई है. इनमें से 13,500 काे नियमित करके मीटर लगा दिए गए हैं और अब उनसे जल शुल्क भी वसूला जा रहा है.
शेष अनधिकृत कनेक्शनाें का सत्यापन जारी है. कनेक्शन के व्यास और बिल्डिंग के आवासीय या गैर-आवासीय हाेने के आधार पर, वाटर मीटर लगाने की लागत 10,000 रुपये या उससे अधिक आती है. यह राशि उपभाेक्ताओं से 150 रुपये की मासिक किश्ताें में उनके पानी के बिलाें में जाेड़कर वसूली जाएगी.
चाेरी रुकने से राजस्व में बढ़ाेतरी शहर काे प्रतिदिन लगभग 630 मिलियन लीटर (एमएलडी) पानी मिलता है, जिसमें पवना बांध से 520 एमएलडी, आंद्रा बांध से 90 एमएलडी और एमआईडीसी से 20 एमएलडी शामिल है. प्रशासन का दावा है कि इस कुल आपूर्ति का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा लीकेज और चाेरी में चला जाता है. अधिकारियाें काे उम्मीद है कि कनेक्शनाें काे नियमित करने और मीटर लगाने से पानी का नुकसान कम हाेगा, चाेरी रुकेगी और मनपा के राजस्व में बढ़ाेतरी हाेगी.