हरिद्वार, 18 सितंबर (वि.प्र./वार्ता)
बहुचर्चित निठारी कांड के आराेपी सुरेंद्र काेली ने हरिद्वार में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. काेली हरिद्वार शहर काेतवाली के भूपतवाला इलाके में रह रहा था.
पिछले कुछ दिनाें से वह इसी इलाके में चाय की दुकान चला रहा था. इसी दाैरान उसने चाय की दुकान पर फांसी लगाकर जान दे दी. घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस माैके पर पहुंची और शव काे कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी. 11 नवंबर 2025 काे अदालत ने उसे इस मामले में बरी कर दिया था. अपने फैसले में सुप्रीम काेर्ट ने कहा था कि काेली काे दाेषी ठहराने और सजा सुनाने के लिए पिछली अदालताें ने जिन सबूताें काे आधार बनाया, वे कानूनी कसाैटी पर खरे नहीं उतरते थे.
अदालत के मुताबिक ये सबूत अवैध, भराेसे के लायक नहीं और आपस में विराेधाभासी थे. निठारी इलाके में 2005-06 के दाैरान बच्चाें और महिलाओं के लापता हाेने की घटनाओं ने पुलिस की चिंता बढ़ा दी थी. लगातार सामने आ रहे इन मामलाें की पड़ताल के दाैरान पुलिस 29 दिसंबर 2006 काे सेक्टर-31 स्थित काराेबारी माेनिंदर सिंह पंढेर की काेठी डी-5 तक पहुंची. काेठी के पीछे माैजूद नाले और आसपास के इलाके की तलाशी में पुलिस काे कई मानव खाेपड़ियां, हड्डियां, कपड़े और दूसरी चीजें मिली थीं.
इन बरामदगियाें के बाद माेनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू सहायक सुरेंद्र काेली काे गिरफ्तार कर लिया गया था. इसके बाद जनवरी 2007 में इस मामले की जांच सीबीआई काे साैंप दी गई. पुलिस ने गुमशुदगी और अपराध से जुड़े कुल 19 अलग-अलग एफआईआर दर्ज किए थे. इनमें से 16 मामलाें में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की थी. जांच के दाैरान सुरेंद्र काेली पर हत्या, दुष्कर्म, अपहरण और सबूत मिटाने जैसे आराेप लगाए गए थे. इस मामले में सह-आराेपी रहे माेनिंदर सिंह पंढेर भी कई साल तक जेल में रहे थे. केस में बरी हाेने के बाद उन्हें 20 अक्टूबर 2023 काे जेल से रिहा कर दिया गया था.