पुणे, 18 सितंबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क) परंपरा और आधुनिकता का संतुलित समन्वय ही विकसित भारत की वास्तविक पहचान है.विकास की दिशा में आगे बढ़ते हुए देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, भाषा, कला, परंपराओं और मूल्यों का संरक्षण उतना ही आवश्यक है जितना आधुनिक बुनियादी ढांचे, तकनीक और आर्थिक प्रगति का विस्तार्. यह विचार उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने पुणे फेस्टिवल के 38वें संस्करण के उद्घाटन समारोह में व्यक्त किए. स्वारगेट स्थित श्री गणेश कला-क्रीड़ा रंगमंच में आयोजित समारोह में राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा, उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल, सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार, पूर्व मुख्यमंत्री सुशीलकुमार शिंदे, सांसद हेमा मालिनी, सांसद डॉ. मेधा कुलकर्णी, पुणे फेस्टिवल के अध्यक्ष कृष्णकुमार गोयल तथा मीरा सुरेश कलमाडी सहित गणमान्य उपस्थित थे. उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने वरिष्ठ अभिनेता मोहन जोशी को ‘पुणे फेस्टिवल जीवन गौरव पुरस्कार’ प्रदान किया. उपराष्ट्रपति ने पुणे को राज्य की सांस्कृतिक राजधानी बताते हुए कहा पुणे फेस्टिवल ने कला, संस्कृति, संगीत, नृत्य, साहित्य, खेल और पर्यटन को एक मंच पर लाकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान बनाई है. उन्होंने कहा कि 21 देशों के विद्यार्थियों की भागीदारी भारत की विविध संस्कृतियों, परंपराओं और आस्थाओं के सम्मान की भावना का प्रतीक है. महिलाओं को अपनी प्रतिभा, कला और सृजनशीलता प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध कराने में भी पुणे फेस्टिवल की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. उन्होंने सामाजिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिला पदाधिकारियों की भी सराहना की. उपराष्ट्रपति ने कहा विकसित भारत की संकल्पना समावेशी, समानतामूलक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी हुई होनी चाहिए. उन्होंने कहा पुणे देश का प्रमुख शैक्षणिक केंद्र है, जहां वेिशविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और पुस्तकालयों के माध्यम से ज्ञान का आदान-प्रदान होता है. सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार ने कहा पुणे फेस्टिवल महाराष्ट्र व भारत की सांस्कृतिक पहचान को वेिश मंच तक पहुंचाने वाला माध्यम है. उन्होंने विरासत से विकास की अवधारणा पर बल देते हुए कहा महाराष्ट्र की भाषाई, सांस्कृतिक व लोककलात्मक विविधता इस महोत्सव के माध्यम से दुनिया के सामने आती है. पुणे फेस्टिवल की चेयरमैन मीरा कलमाड़ी ने महोत्सव की 38 वर्षों की यात्रा और उपलब्धियों का उल्लेख किया. उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने पुणे फेस्टिवल के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को बधाई देते हुए संस्थापक अध्यक्ष दिवंगत सुरेश कलमाडी के योगदान को भी स्मरण किया.
महोत्सव हेतु शासन पूर्ण सहयोग करेगा : उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार
उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा पुणे फेस्टिवल ने संगीत, नृत्य, लोककला, खेल व पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों के कलाकारों को मंच प्रदान किया है. महिला महोत्सव, लावणी महोत्सव, चित्रकला, पाककला, मेहंदी प्रतियोगिताएं तथा अंतरराष्ट्रीय सहभागिता
इसकी प्रमुख विशेषताएं ह्ैं. उन्होंने महोत्सव के लिए शासन की ओर से पूर्ण सहयोग का ओशासन दिय.
पुणे फेस्टिवल राष्ट्रीय एकता को सशक्त बना रहा : राज्यपाल जिष्णुदेव वर्माराज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने कहा कि गणेशोत्सव को ‘महाराष्ट्र का उत्सव’ के रूप में आधिकारिक मान्यता दी गई है और पुणे फेस्टिवल विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को सशक्त बना रहा है. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र के सांस्कृतिक पर्यटन को वैेिशक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए शासन प्रयासरत है तथा पुणे फेस्टिवल में भविष्य में एक वैेिशक सांस्कृतिक महोत्सव बनने की अपार क्षमता है. उन्होंने महात्मा ज्योतिराव फुले और क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले की कर्मभूमि पुणे को सामाजिक परिवर्तन, शिक्षा और सांस्कृतिक जागरूकता का केंद्र बताया. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में चल रहे ‘सेवा समर्पण अभियान’ के अंतर्गत सेवा कार्यों को बढ़ाने का आह्वान किया.