नई दिल्ली, 1 सितंबर (वि.प्र./वार्ता)
सुप्रीम काेर्ट द्वारा छात्राें के आंदाेलन की देशभर में दर्ज सभी एफआईआर रद्द कर दिया गया है. इसके अलावा काेर्ट ने नए मामले भी दर्ज नहीं करने का आदेश दिया है.
दूसरी ओर कई राज्य सरकाराें ने भी छात्राें के खिलाफ दर्ज मामले रद्द करने की मांग एससी से की थी. इनमें असम में 5, बिहार में 69, पश्चिम बंगाल में 8, और महाराष्ट्र में 34 मामले दर्ज किए गए थे. सुप्रीम काेर्ट के इस आदेश के बाद सीजेपी के छात्राें ने संताेष व्य्नत किया. सुप्रीम काेर्ट ने अपनी विशेष ताकत के तहत बड़ा फैसला किया है.
यह काॅकराेच जनता पार्टी की बड़ी जीत भी मानी जा रही है. आगामी 5 सितंबर काे सीजेपी द्वारा जंतर-मंतर पर हाेने वाला प्रदर्शन काे पार्टी ने रद्द कर दिया है. केंद्र सरकार ने मृतकाें के परिजनाें काे मुआवजा देने सहित सीजेपी की तीनाें मांगे मानने का काेर्ट काे आश्वासन दिया है. बता दें कि जंतर-मंतर सहित देशभर में पेपर लीक काे लेकर 20 जून से 25 जुलाई तक आंदाेलन हुआ था. इस मामले के दाैरान शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान काे इस्तीफा देना पड़ा था. हालांकि, सरकार ने कहा कि प्रदर्शन के दाैरान क्रिमिनल रिकाॅर्ड वाले 2,873 लाेग वहां पहुंचे थे.
इनमें से जिन लाेगाें ने उस दाैरान मारपीट या संपत्ति काे नुकसान पहुंचाया हाे ताे उन पर यह केस चलता रहेगा. सुनवाई के दाैरान साॅलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि छात्राें के विराेध प्रदर्शन के बाद सीजेपी नेताओं से किए गए तीनाें वादे पूरे करने के लिए सरकार वचनबद्ध है. नीट पेपर लीक के विराेध में प्रदर्शन करने वाले छात्राें पर दर्ज 13 एफआईआर रद्द करने की दिल्ली पुलिस की याचिका 31 अगस्त काे साॅलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दायर की थी.