विचाराें काे शुद्ध, सकारात्मक बनाओ : श्री अभिषेक मुनिजी

    20-Sep-2026
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 कोथरुड, 19 सितंबर (आ. प्र.)

श्री वर्धमान सांस्कृतिक प्रतिष्ठान में विराजित गुरुदेव श्री अभिषेक मुनिजी ने कहा कि, व्यक्ति का सुख और दुःख केवल परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि उसकी सोच, दृष्टिकोण और जीवन जीने की शैली पर भी निर्भर करता है. जिस व्यक्ति का जीवन अच्छा है, वह कहीं भी रहे, सुखी ही रहता है. वहीं जो व्यक्ति नकारात्मक सोच वाला होता है, वह कहीं भी रहे, परेशान ही रहता है. बाहरी परिस्थितियां मनुष्य के जीवन में हमेशा उसके अनुकूल रहें, यह आवश्यक नहीं है. कभी सुख आता है तो कभी दुःख, कभी अनुकूलता मिलती है तो कभी प्रतिकूलता, लेकिन इन परिस्थितियों के बीच व्यक्ति का दृष्टिकोण कैसा रहता है, यही उसके जीवन की वास्तविक दिशा तय करता है. नकारात्मक सोच व्यक्ति को छोटी-छोटी बातों में भी परेशानी का अनुभव कराती है. ऐसा व्यक्ति उपलब्ध सुख-सुविधाओं और अवसरों को देखने के बजाय उन बातों पर अधिक ध्यान देता है, जो उसके मन के अनुकूल नहीं हैं. इसके विपरीत सकारात्मक दृष्टिकोण वाला व्यक्ति कठिन परिस्थितियों में भी समाधान खोजने का प्रयास करता है और प्रत्येक अनुभव से कुछ सीखने की भावना रखता है. अपने विचारों को शुद्ध और सकारात्मक बनाने का निरंतर प्रयास करें. मन में क्रोध, ईर्ष्या, द्वेष, शिकायत और निराशा को स्थान देने के बजाय क्षमा, संतोष, करुणा, मैत्री और समभाव को जीवन का हिस्सा बनाएं. मनुष्य अपने भीतर परिवर्तन लाकर जीवन को अधिक शांत, संतुलित और सार्थक बना सकता है.