नई दिल्ली, 20 सितंबर (वि.प्र.)
छाेटे-माेटे आपराधिक मामलाें के चलते अदालताें पर भारी बाेझ है. यह टिप्पणी सुप्रीम काेर्ट में 4.27 कराेड़ से अधिक केसेस का जिक्र करते हुए सुप्रीमकाेर्ट के जस्टिस उज्ज्वल भुयान ने चिंता जतायी.
उन्हाेंने कहा- निचली अदालताें काे छाेटे-माेटे मामलाें काे विशेष अभियान चलाकर खत्म कर देना चाहिए. उन्हाेेंने कहा- साेशल मीडिया पर टिप्पणी, प्रदर्शन, नारेबाजी, पुस्तकाें आदि के छाेटे-माेटे मामले दर्ज हाे रहे हैं. इन्हें वहीं तत्काल निपटाने की जरूरत है.
बार एंड बेंच की रिपाेर्ट के मुताबिक, जस्टिस उज्ज्वल भुयान ने कहा कि सिर्फ खाना खाने, कविताएं सुनाने, प्रदर्शनाें में शामिल हाेने, नारे लगाने, साेशल मीडिया पर टिप्पणी करने और स्टैंड-अप काॅमेडियन के रूप में प्रस्तुति देने जैसे मामलाें में भी आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं. इसके अलावा, किताबाें और फिल्माें के शीर्षक तथा उनकी सामग्री समेत कई अन्य तुच्छ आधाराें पर भी मामले दर्ज हाे रहे हैं.
उन्हाेंने कहा, ये आराेप हास्यास्पद हैं और अक्सर व्यक्ति की बुद्धिमत्ता का अपमान करने वाले हाेते हैं. इसके बावजूद, ऐसे आपराधिक मामलाें का पंजीकरण बेराेकटाेक जारी है. इतना ही नहीं, कुछ मामलाें में आराेप पत्र भी दाखिल किए जाते हैं, जिसके बाद मुकदमे की कार्यवाही शुरू हाे जाती है.
इसलिए उन्हाेंने सुझाव दिया कि निचली अदालताें काे तुच्छ आपराधिक मामलाें काे खत्म करने के लिए विशेष अभियान चलाना चाहिए. जस्टिस भुयान ने कहा, जैसा कि मैंने कहा है, ये मामले व्यवस्था काे और अधिक अव्यवहारिक बना रहे हैं. इनमें नतीजे लगभग पहले से ही तय हाेते हैं और हमारी न्याय व्यवस्था उदार लाेकतांत्रिक दुनिया के सामने उपहास का पात्र बन रही है. हम जितनी जल्दी इस दिशा में कदम उठाएंगे, हम सभी के लिए उतना ही बेहतर हाेगा. आराेपियाें के जांच में सहयाेग नहीं करने की राज्य की अक्सर दाेहराई जाने वाली शिकायत पर जस्टिस भुयान ने स्पष्ट टिप्पणी की.
उन्हाेंने कहा कि इसलिए मुझे यह बात काफी हास्यास्पद लगती है जब राज्य की ओर से पेश वकील अदालत से कहते हैं कि याचिकाकर्ता जांच अधिकारी के सामने पेश ताे हुआ था, लेकिन वह सहयाेग नहीं कर रहा है.