काेलकाता, 20 सितंबर (वि.प्र.)
पश्चिम बंगाल के 4133 सरकारी स्कूलाें में एक भी छात्र नहीं हैं. सरकारी रिपाेर्ट के अनुसार शिक्षकाें काे बिना बच्चाें काे पढ़ाए सरकार काे वेतन देना पड़ रहा है. इससे सरकार भी चिंतित है. सूत्राें के अनुसार सरकार अब इन स्कूलाें काे ‘पीपीपी माॅडल’ के तहत चलाने की तैयारी में कमर कस ली है. प्राइवेट स्कूलाें के प्रति बढ़ती दिलचस्पी से सरकारी स्कूलाें का बुरा हाल हाे रहा है. बता दें कि इस सब के बाद भी छात्र संख्या शून्य हाेने के बाद भी शिक्षकाें की तैनाती और सैलरी चालू है. जब हम स्कूल की बात करते हैं ताे हमारे सामने बच्चाें से भरी कक्षाएं, पढ़ाते हुए शिक्षक और पढ़ाई का माहाैल नजर आता है. लेकिन सरकारी आंकड़ाें में ऐसी बात नहीं है. पूरे देश में जीराे एडमिशन वाले कुल 5,663 स्कूलाें में लगभग 73 प्रतिशत स्कूल इसी राज्य के हैं. सरकारी रिपाेर्ट णऊखडए+ 2025-26 के आंकड़ाें में पश्चिम बंगाल की स्कूल शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा हैरान करने वाला आंकड़ा सामने आया है. राज्य में ऐसे 4,133 स्कूल दर्ज किए गए हैं, जहां एक भी छात्र का नामांकन नहीं है. इसके बाद इन स्कूलाें में कुल 19,502 शिक्षक तैनात बताए गए हैं. यानी छात्र संख्या शून्य हाेने वाले स्कूलाें में भी हजाराें शिक्षकाें की संख्या दर्ज है. पश्चिम बंगाल में कुल 93,147 स्कूल हैं. इनमें 1,77,26,591 छात्र नामांकित हैं और कुल 5,81,774 शिक्षक दर्ज किए गए हैं. इसी तालिका में ‘शून्य नामांकन वाले स्कूल’ के सामने पश्चिम बंगाल के लिए 4,133 का आंकड़ा दिया गया है. इसका मतलब है कि राज्य के हजाराें स्कूल ऐसे हैं, जहां रिपाेर्टिंग के समय काेई छात्र नामांकित नहीं था.
रिपाेर्ट में बताया गया है कि पश्चिम बंगाल में ‘शून्य नामांकन वाले स्कूलाें में शिक्षक की संख्या 19,502 है. यानी जिन 4,133 स्कूलाें में छात्र संख्या शून्य है, वहां 19,502 शिक्षकाें की तैनाती दर्ज की गई है. अगर इसे औसतन समझा जाए ताे हर ऐसे स्कूल में करीब 4.7 शिक्षक हैं, जहां काेई भी छात्र नहीं है. राज्य के कुल 5,81,774 शिक्षकाें में करीब 3.35 प्रतिशत शिक्षक ऐसे स्कूलाें में दर्ज हैं, जहां छात्र नामांकन शून्य है.