‌‘लागा खादी पे दाग‌’ पर ठहाके और तिरंगे पर तालियां

हिंदी हास्य कवि सम्मेलन‌’ में कवियों ने प्रेम की बेरुखी,जिंदगी का दर्द व देशभक्ति के जज्बे से जमाया रंग

    22-Sep-2026
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greg
स्वारगेट, 21 सितंबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)

 व्यंग्य, शब्दों की चुटीली बाजीगरी और समाज में हर पल दिखाई देने वाली विसंगतियों पर हल्के-फुल्के अंदाज में मजेदार टिप्पणियां करती कविताओं से रविवार को हिंदी हास्य कवि सम्मेलन रंगीन हो उठा. कविताओं में दर्द और कड़वे वचन से जीवन का सच सामने आया. स्वारगेट स्थित गणेश कला क्रीड़ा केंद्र में आयोजित पुणे फेस्टिवल का ‌‘हिंदी हास्य कवि सम्मेलन‌’ सिर्फ ठहाकों का कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि हास्य की आड़ में जिंदगी, समाज और देश की तस्वीर भी दिखाता रहा. कविताओं के साथ हिंदी हास्य कवियों द्वारा रोचक अंदाज में सुनाए गए चुटकुलों और किस्सों को भी दर्शकों की जोरदार तालियां और ठहाके मिले. इस कवि सम्मेलन में राजस्थान के वरिष्ठ कवि जगदीश सोलंकी, कवि बुद्धिप्रकाश, लखनऊ के डॉ. सर्वेश आस्थाना, हरियाणा के अरुण जेमिनी, पुणे के दिलीप शर्मा और प्रतापगढ़ की कवयित्री साक्षी तिवारी की कविताओं से हिंदी हास्य कविता की यह महफिल लगातार रंग पकड़ती गई. कार्यक्रम की शुरुआत में पुणे फेस्टिवल के अध्यक्ष कृष्णकुमार गोयल, मुख्य संयोजक एड.अभय छाजेड, पूर्व गृह राज्यमंत्री रमेश बागवे और सांस्कृतिक कार्यक्रम के मुख्य संयोजक डॉ. सतीश देसाई के हाथों सभी कवियों का सम्मान किया गया. इस अवसर पर कृष्णकुमार गोयल ने कहा कि साहित्य और कला की गुणवत्तापूर्ण प्रस्तुतियों को दिल से सराहने वाला पुणे शहर है. हिंदी हास्य कविताओं के माध्यम से यहां बेहतरीन साहित्यिक महफिल सजी है. आज की तनावपूर्ण जीवनशैली में हास्य का महत्व और बढ़ गया है. यह प्रस्तुति रसिकों के चेहरे और मन में भी हास्य के रंग खिलाएगी. इस कार्यक्रम के मुख्य प्रायोजक न्याती ग्रुप के अध्यक्ष नितिन न्याती, प्राइड ग्रुप के प्रमुख अरविंद जैन और कोहिनूर ग्रुप के संयुक्त प्रबंध निदेशक विनीत गोयल प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित थे. द्वारका जालान ने कवि सम्मेलन का संचालन किया. कवयित्री साक्षी तिवारी ने शुरुआत में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की. इसके बाद कवि बुद्धिप्रकाश ने हल्के व्यंग्य से भरपूर कविता प्रस्तुत की. दर्द और कड़वे वचन भी जब सहन होने लगे तब समझ लेना के ‌‘बुद्धि‌’ अब तो जीना जान गये इन पंक्तियों के माध्यम से उन्होंने जीवन पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की. साक्षी तिवारी ने व्यंग्य की धार को और तीखा करते हुए सरल शब्दों में कविता सुनाई- अभी मुस्कुराने का मन तो नहीं है तुम्हारे लिये मुस्कुराना पड़ेगा कोई आप के नाम से मुझको छेड़े उन्हें क्या बताऊं, बता दीजिएगा. सर्वेश अस्थाना की कविताओं में हास्य के साथ देशप्रेम का रंग भी दिखाई दिया. उनकी पंक्तियां क्या बतलाऊं इस धरती पर कैसा लगता है, इस मिट्टी का जर्रा-जर्रा अपना लगता है. दर्शकों के दिलों को छू गईं. अरुण जेमिनी की हास्य कविता में गंभीर संदेश भी छिपा था. उन्होंने कारगिल युद्ध में घायल एक सैनिक को भिखारी, कवि, प्रोफेसर, अभिनेता, नेता और स्कूली बच्चे का खून दिए जाने के बाद उसकी भाषा किस तरह बदलती है, इस कल्पना को बेहद प्रभावी और हास्यपूर्ण अंदाज में प्रस्तुत किया. पुणे के कवि दिलीप शर्मा ने प्रसिद्ध गीत ‌‘लागा चुनरी में दाग‌’ की धुन पर लागा खादी पे दाग, छुपाऊं कैसे, जाके बापू से नजरें मिलाऊं कैसे‌’ जैसी पैरोडी कविता प्रस्तुत कर खूब दाद बटोरी. कार्यक्रम का समापन जगदीश सोलंकी की चर्चित कविता तिरंगा से हुआ. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दर्शक उपस्थित रहे और पूरे कवि सम्मेलन के दौरान तालियों तथा ठहाकों की गूंज बनी रही.
 
 कार्टूनिस्ट कैफे क्लब की व्यंग्यचित्र प्रदर्शनी को भारी रिस्पांस
 राज्य के व्यंग्य चित्रकारों की संस्था कार्टूनिस्ट कैफे क्लब की ओर से राज्य के 110 से अधिक व्यंग्य चित्रकारों के 300 से अधिक व्यंग्य चित्रों की प्रदर्शनी का उद्घाटन बालगंधर्व कलादालान में पत्रकार नीलेश खरे ने स्वयं गणपतिजी का चित्र बनाकर किया. इस प्रदर्शनी को भारी रिस्पांस मिला. इस प्रदर्शनी का आज अंतिम दिन है. इस अवसर पर मुंबई के वरिष्ठ व्यंग्य चित्रकार संजय मिस्त्री व व्यंग्य चित्रकार प्रशांत कुलकर्णी प्रमुख अतिथि के रूप में उपस्थित थे इनके साथ ही कार्यक्रम में चारुहास पंडित, योगेंद्र भगत, शरयू फरकांडे, संदेश चव्हाण, सुहास पालीमकर, जगदीश कुलकर्णी, उमेश कवले व विवेक प्रभुकेलुस्कर जैसे कई व्यंग्य चित्रकार मौजूद थे. व्यंग्य चित्रकार वेिशास सूर्यवंशी ने आभार व्यक्त किया. इस अवसर पर बालगंधर्व कलादालान में पुणे फेस्टिवल के अध्यक्ष कृष्णकुमार गोयल, समन्वयक सचिन आडेकर, प्रमोद उमरदंड, आबा जगताप, अनवर शेख और बड़ी संख्या में कलाप्रेमी उपस्थित थे.
 
 
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