नई दिल्ली, 22 सितंबर (वि.प्र./वार्ता)
दिल्ली एसआईआर में 33 लाख लाेगाें काे नाेटिस पर सुप्रीम काेर्ट सख्त हाेते हुए चुनाव आयाेग से जवाब मांगा है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा-नाेटिस थाेक में मशीन से जारी हुए लगते हैं.
काेर्ट ने कहा-लाेगाें की परेशानी पर ध्यान नहीं दिया गया है. 47 लाख नाम हटाने के बाद बड़ी संख्या में नाेटिस संदेह पैदा करती है.
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा-चुनाव आयाेग पूरा विवरण, स्टेटस रिपाेर्ट अदालत में पेश करे. इस पर एडवाेकेट प्रशांत भूषण ने कहा-लाेगाें द्वारा जरूरी जानकारी देने के बाद भी अतिर्नित जानकारी मांगने के पीछे षड्यंत्र ताे नहीं है.
जस्टिस जाॅयमाल्या बागची ने आयाेग से यह जांचने काे कहा कि कहीं बिना पर्याप्त जांच के ताे नाेटिस नहीं भेजे जा रहे. नाेटिस में वाेटर्स काे आपत्ति की सही वजह बताई जा रही है या नहीं. काेर्ट ने चुनाव आयाेग काे अब तक उठाए गए कदमाें की स्टेटस रिपाेर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया. साथ ही, बिहार और पश्चिम बंगाल एसआईआर मामलाें में दिए अंतरिम निर्देशाें का पालन करने काे कहा. कई वाेटर्स काे नाेटिस ताे दिए गए, लेकिन उसमें यह साफ नहीं बताया गया कि उनके नाम पर आपत्ति क्याें है. वाेटर्स काे रिकाॅर्ड में गड़बड़ी की कैटेगरी में किस आधार पर रखा गया है और जवाब देने के लिए उन्हें काैन से दस्तावेज देने हाेंगे. याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने उम्र के अंतर का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर मतदाता और उसके माता-पिता की उम्र के अंतर काे आधार बनाया गया है, ताे मतदाता इसका जवाब कैसे देगा, जबकि जरूरी जानकारी वाले दस्तावेज उसके पास हाे भी सकते हैं और नहीं भी.
प्रशांत भूषण ने दावा किया कि ड्राफ्ट वाेटर लिस्ट से करीब 47 लाख नाम हटाए गए हैं. इनमें बड़ी संख्या में मतदाताओं काे शिफ्टेड यानी दूसरी जगह चले जाने की कैटेगरी में रखा गया है. ऐसे मतदाता अपना सही स्टेटस कैसे साबित करेंगे. हर नाेटिस में कारण बताया गया है.
मामला याचिकाकर्ताओं के बताए अनुसार इतना गंभीर नहीं है. सत्यापन के लिए बताए गए 12 दस्तावेजाें की लिस्ट अंतिम या सीमित सूची नहीं है. प्रक्रिया पूरी करने की अंतिम तारीख 29 अक्टूबर है. अगर जरूरत पड़ी ताे समयसीमा बढ़ाई जा सकती है. हम काेर्ट काे भराेसा देते हैं कि तय प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी मतदाता का नाम नहीं हटाया जाएगा. आपने अखबार में पढ़ा हाेगा कि अब दिल्ली में कचरा उठाने वाली गाड़ियाें से भी लाेगाें काे जागरूक किया जा रहा है. दरअसल, चुनाव आयाेग के पास इतने सारे लाेगाें तक पहुंचने का काेई आसान तरीका नहीं था. इसलिए उन्हाेंने राेजमर्रा की चीजाें का सहारा लिया. कचरा गाड़ियाें के अलावा, अखबाराें और रेडियाे जिंगल्स के जरिए भी लाेगाें तक यह संदेश पहुंचाया जा रहा है कि वे अपने नाेटिस का जवाब जल्द से जल्द दें. इसके अलावा, हर रविवार काे स्पेशल कैंप भी लगाए जा रहे हैं.