कोथरुड, 22 सितंबर (आ.प्र.)
विश्व शांति दिवस पर एमआईटी डब्ल्यूपीयू में ‘विश्व में शांति की जरूरत’ विषय पर आयोजित परिसंवाद में माईर्स एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के संस्थापक अध्यक्ष विश्वधर्मी प्रा.डॉ. विश्वनाथ दा. कराड ने कहा कि दुनिया भर में चल रहे युद्ध, आतंकवादी गतिविधियां और हिंसक संघर्षों से मानव जीवन को हो रहा भारी नुकसान बेहद चिंताजनक और निंदनीय है. जातीय और सांप्रदायिक हिंसा में निर्दोष लोगों की हत्या भी दुर्भाग्यपूर्ण है. ऐसे भीषण संकटों का सामना कर रही दुनिया को शांति की सख्त जरूरत है. ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ और मएकम् सत् विप्रा बहुधा वदन्तिफ का भारतीय संस्कृति का संदेश पूरी दुनिया को विनाश की छाया से बचा सकता है. इस अवसर पर एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. राहुल कराड, कुलपति प्रा.डॉ. रविराज एन. सीताराम, नागपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एस.एन. पठान, वरिष्ठ सलाहकार डॉ. संजय उपाध्ये, डब्ल्यूपीयू के कुलसचिव प्रो. गणेश पोकले, पीस स्टडी के प्रा.डॉ. मिलिंद पात्रे, डॉ. महेश थोरवे, मंदार बोकिल, अजय महाजन और योगेश पारखी उपस्थित थे. डॉ. राहुल कराड ने कहा, शांति की संस्कृति विकसित करने में शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. स्कूल और उच्च शिक्षा संस्थान सहिष्णुता, विविधता, मानवाधिकार, संवाद और अहिंसक संघर्ष समाधान के बारे में समझ बढ़ा सकते हैं. डिजिटल युग में मीडिया और सोशल मीडिया साक्षरता भी महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि गलत जानकारी सामाजिक तनाव बढ़ा सकती है. प्रा. डॉ. रविराज एन. सीताराम, डॉ. संजय उपाध्ये ने भी विचार व्यक्त किए.
चार दशकों से अधिक समय से वैश्विक शांति के लिए कार्य
‘एंजल ऑफ वर्ल्ड पीस’ पुरस्कार से सम्मानित डॉ. कराड पिछले चार दशकों से अधिक समय से शिक्षा, दर्शन, अध्यात्म और वैश्विक शांति के लिए कार्य कर रहे हैं. उन्होंने विज्ञान व अध्यात्म के समन्वय से मूल्य-आधारित वैश्विक शिक्षा प्रणाली लागू की है. दुनिया के सबसे बड़े विश्व शांति गुंबद का निर्माण कर उन्होंने सर्वधर्म समभाव और विश्व बंधुत्व का संदेश दिया है.