ईगो खत्म करने से लौटेंगी खुशियां, मिलेगी राहत मिलेगी

    23-Sep-2026
Total Views |

Ego 
ये देखकर बुरा लगता है कि कुछ सफल लाेग कई काम र्सिफ ‘सेंटर ऑफ अटै्रक्शन’ यानी आकर्षण का केंद्र बनने के लिए करते हैं. इसके लिए वे अपने अहम काे अहमियत देने से भी नहीं चूकते हैं. अहं माेटिवेशन का साेर्स हाे सकता है. मगर, ये माेटिवेशन का गलत तरीका है. इसे समय-समय पर ीडिंग की जरूरत पड़ती है.
 
समस्या ये है कि अहं काे ीड करने पर सुपीरियरिटी काॅम्प्लेक्स पैदा हाेता है. वहीं, ऐसा न करने से इींरियरिटी काॅम्प्लेक्स आता है. अहं किसी भी तरह का हाे, लेकिन यह दिमाग का सुकून और मन की शांति छीन लेता है. इसे माेटिवेटर बनाने के लिए आपकाे अपने सुख-चैन काे दांव पर लगाना पड़ता है. सवाल ये है कि क्या आप कंघी खरीदने के लिए बालाें काे बेचना चाहेंगे? हम अहं काे खत्म करके रिलेशनशिप बनाने की बजाय रिलेशनशिप खत्म करके अहम काे ीड करना शुरू कर देते हैं. अहं की वजह से रिश्ते टूट जाते हैं. महत्वपूर्ण माैके हाथ से निकल जाते हैं.
 
इतना कुछ हाेने के बाद भी हम अहं काे खुद से बाहर निकालने का प्रयास नहीं करते हैं. अहं से भरे इंसान की स्थिति हर समय आग पर चलने जैसी हाेती है. ऐसे में हर पल मुश्किल और हर समस्या गंभीर लगती है. अहंम और आराम के बीच काेई रिश्ता नहीं है. अहंम में आप हर वक्त समस्याओं काे जीतने की काेशिश करते हैं. आप दूसराें से बेहतर पराॅर्म करने में जुट जाते हैं. अहं काे छाेड़कर आप खुद से जीतने का प्रयास करते हैं और अपनी क्षमताओं से मैक्सिमम आउटपुट देने में लग जाते हैं. इसमें आप खुद से लड़ने लगते हैं. आप खुद के भीतर चल रही कश्मकश के खिलाफ लड़ते हैं.
 
एक काैआ जिसकी चाेंच में मांस का टुकड़ा है उसके पीछे कई पंछी लग जाते हैं. चाेंच से टुकडा गिरते ही सभी पंछी टुकड़े के पीछे लग जाते हैं. अकेले उड़ता काैआ महसूस करता है कि टुकड़ा ेंकते ही उसे आकाश में अकेले उड़ने की आजादी मिल गई है. ऐसा ही आपके साथ है. अपने भीतर से मांस के टुकड़े यानी अहं काे निकाल दें. इससे आपकाे शांति से जीने का माैका मिलेगा. अहं काे अपने अंदर से निकाल दें. लेकिन कैसे? ये आसान है. इसके लिए मन की शांति काे बाकी चीजाें से ज्यादा महत्ता दें.