नई दिल्ली, 23 सितंबर (वि.प्र./वार्ता)
देश के मुख्य चुनाव आयु्नत ज्ञानेश कुमार ने एसआईआर के जरिए जनता से गद्दारी की. आयु्नत ने मनमाने निर्णय लिए. दाे चुनाव आयु्नताें की 10 महीनाें में 14 आपत्तियाें काे दरकिनार कर नियमाें की धज्जियां उड़ायीं.
एसआईआर काे लेकर चाैंकाने वाले खुलासे से पूरा देश हैरान है. ज्ञानेश कुमार पर आराेप है कि उन्हाेंने अपने सहयाेगी आयु्नताें काे अंधेरे में रखा. इन आयु्नताें की मंजूरी के बिना आदेश जारी किए. यहां तक कि बैठकाें की जानकारी तक छिपाई गई. उन्हाेंने अपने अधिकाराें का दुरुपयाेग किया. बंगाल और दिल्ली में एसआईआर में भारी धांधली हुई. देश में 13 कराेड़ नाम काटने की प्रक्रिया में भी विराेध काे दरकिनार किया गया.
चुनाव आयाेग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) काे लेकर मतभेद की कथित रिपाेर्ट पर बुधवार काे बयान जारी किया है.
चुनाव आयाेग ने सफाई देते हुए कहा कि चुनाव आयुक्ताें की लिखित टिप्पणियां, सुझाव और फैसलाें की आंतरिक जांच एक सामान्य प्रक्रिया है. इसका उद्देश्य पारदर्शिता बनाए रखना और कानूनी नियमाें का पालन सुनिश्चित करना है. एक रिपाेर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्ताें में मतभेद का विवाद द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपाेर्ट के बाद शुरू हुआ. यह रिपाेर्ट 23 सितंबर काे पब्लिश की गई. इसके मुताबिक, चुनाव आयाेग के दाे चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जाेशी ने कहा कि कई फैसले उनकी जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए. आयाेग के फैसलाें पर 28 अक्टूबर 2025 से 14 अगस्त 2026 के बीच 14 बार लिखित आपत्ति जताई है. इनमें 16 अप्रैल काे चार आपत्तियां दर्ज की गईं.
इन आपत्तियाें की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार काे भी भेजी गईं. कुछ आपत्तियां उन उप चुनाव आयुक्ताें काे भी भेजी गईं, जाे संबंधित काम की निगरानी कर रहे थे.
यह विवाद बिहार से जून 2025 में शुरू हुए स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के बीच सामने आया है. एसआईआर के तहत 30 राज्याें और केंद्र शासित प्रदेशाें की ड्राफ्ट मतदाता सूचियाें से 13 कराेड़ से ज्यादा नाम हटाए गए हैं. ईसीआई संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत काम करने वाली संवैधानिक संस्था है. इसमें लिखित नाेट, चर्चा और आंतरिक चेक एंड बैलेंस एक सामान्य प्रक्रिया है. आयाेग द्वारा जारी सभी आधिकारिक आदेश और फैसले पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत हैं और ढहश उहळशष एश्रशलींळेप उेााळीीळेपशी रपव जींहशी एश्रशलींळेप उेााळीीळेपशीी रलीं, 2023 के तहत हैं. ड्राफ्ट के दाैरान सदस्याें द्वारा उठाए गए सवाल / सुझाव वाेटर के अधिकाराें की सुरक्षा के लिए सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं. किसी भी संस्था में विचार-विमर्श के दाैरान अलग-अलग राय आना सामान्य है.
यह फैसला लेने से पहले की प्रक्रिया है. तीनाें आयुक्ताें में से सिर्फ एक ही नहीं, हर अधिकारी काे सुझाव देने का अधिकार है. 10 महीने में सिर्फ कुछ आंतरिक नाेट्स काे दिखाना और बाकी फैसलाें काे नजरअंदाज करना पूरी तस्वीर नहीं है. पिछले एक साल में आयाेग ने लगभग 40 नई पहल और कई चुनाव सुधार किए हैं, जिसमें पूरे देश में एसआईआर भी शामिल है. ये सभी फैसले पूरे आयाेग के सर्वसम्मति से लिए गए फैसले हैं. आयाेग ने हाल ही में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुदुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में बड़े चुनाव सफलतापूर्वक कराए हैं. ईसीआई के डिजिटल प्लेटफाॅर्म जैसे एउखछशीं, सख्त डेटा सिक्याेरिटी प्राेटाेकाॅल के तहत काम करते हैं. वाेटर लिस्ट में नाम जाेड़ना / हटाना ईआरओ और डीईओ अपने कानूनी अधिकाराें के तहत करते हैं. चुनाव आयाेग पूरी ईमानदारी के साथ अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रतिबद्ध है.