रहाटणी, 23 सितंबर
(आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
रहाटणी में पैतृक जमीन पर बनी एक हाउसिंग साेसायटी परियाेजना काे लेकर जमीन के मालिकाें ने डेवलपर पर धाेखाधड़ी के गंभीर आराेप लगाए हैं. डेवलपर पर मनपा के नियमाें का उल्लंघन करने और तीन अवैध मंजिलें बनाने का आराेप है. आराेपाें के अनुसार, मैसर्स साईं बिल्डकाॅन के पार्टनर पवन वाधवानी ने ‘साईं संकुल’ परियाेजना के ‘बी-विंग’ की स्वीकृत याेजना का उल्लंघन करते हुए चाैथी, पांचवीं और छठी मंजिल का अवैध निर्माण किया.
डेवलपर पर इन मंजिलाें के 14 फ्लैटाें काे भारी रकम में बेचकर निर्माण क्षेत्र में चिंता पैदा करने का भी आराेप है. रहाटणी स्थित सर्वे नंबर 64/5/1, 64/1/3, 63/1/4 और 64/1/5 की पैतृक प्राॅपर्टी काे भूमि स्वामियाें ने मैसर्स साईं बिल्डकाॅन के पार्टनर पवन वाधवानी काे विकास (डेवलपमेंट) के लिए दिया था. हवेली-5 सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में एक पंजीकृत विकास समझाैता (दस्तावेज़ संख्या 2232) निष्पादित किया गया था. समझाैते की शर्ताें के अनुसार, परियाेजना में कुल निर्माण क्षेत्र का 50% हिस्सा मूल भू-स्वामियाें काे दिया जाना था. इसके बाद डेवलपर ने ‘साईं संकुल’ नाम से दाे बहुमंजिला बिल्डिंगें ‘ए-विंग’ और ‘बी-विंग’ बनाईं. शुरुआत में, पिंपरीचिंचवड़ मनपा के भवन अनुमति विभाग से ‘इझ ठरहरींरपळ 64/2009’ के अंतर्गत निर्माण की अनुमति प्राप्त की गई थी.
इसके बाद संशाेधित भवन अनुमति ‘इझ ठरहरींरपळ 25/2011’ के अंतर्गत मंजूरी मिली. स्वीकृत याेजनाओं और अनुमतियाें के अंतर्गत, ‘ए-विंग’ काे 49 आवासीय फ्लैटाें के लिए और ‘बी-विंग’ काे 24 आवासीय फ्लैटाें के लिए मंजूरी दी गई थी.
मनपा की मंजूरी में ‘ए-विंग’ के लिए ॠ+6 संरचना और ‘बी-विंग’ के लिए पार्किंग + 3-मंजिला संरचना की अनुमति थी. इसका मतलब यह था कि ‘बी-विंग’ में कानूनी रूप से केवल तीन आवासीय मंजिलें ही बनाई जा सकती थीं. हालांकि, डेवलपर वाधवानी ने कथित ताैर पर मनपा के नियमाें और स्वीकृत याेजना काे दरकिनार करते हुए बिना अनुमति के ‘बी- विंग’ की चाैथी, पांचवीं और छठी मंजिल का निर्माण कर दिया. यह कथित निर्माण यूनिफाइड डेवलपमेंट कंट्राेल एंड प्रमाेशन रेगुलेशन का सीधा उल्लंघन है. यह भी आराेप है कि भू-स्वामियाें काे निर्माण क्षेत्र के उनके अनुबंधात्मक 50% हिस्से से आर्थिक रूप से वंचित कर दिया गया, जबकि डेवलपर के फायदे के लिए अतिरिक्त अवैध मंजिलें विकसित की गईं.
आराेप में यह भी कहा गया है कि डेवलपर ने फ्लैट खरीदाराें और मूल भू-स्वामियाें दाेनाें काे अंधेरे में रखा. अपनी शिकायत लेकर भू-स्वामी पुलिस आयुक्त के पास पहुंचे भारती सुदाम नढ़े, जयराम बाबूराव नढ़े, ज्ञानेश्वर नढ़े और गणेश नढ़े ने पुलिस आयुक्त से संपर्क किया है. उन्हाेंने आराेप लगाया कि विकास समझाैते के तहत फ्लैट उन्हें नहीं साैंपे गए और इसके बजाय डेवलपर द्वारा बेच दिए गए. उन्हाेंने आगे आराेप लगाया कि फर्जी दस्तावेज और अनुमतियां तैयार की गईं और उन्हें असली बताकर पेश किया गया, जिससे उनके और सरकार के साथ धाेखाधड़ी और विश्वासघात हुआ.