मावल/पुणे, 27 सितंबर (आज का आनंद न्यूज नेटवर्क)
बाॅम्बे हाईकाेर्ट ने मावल के गहुंजे स्थित विशाल लाेढ़ा बेलमाेंडाे प्राेजेक्ट की डेवलपर ‘मैक्राेटेक डेवलपर्स लिमिटेड’ काे ‘सेंट एंड्रयूज काे-ऑपरेटिव हाउसिंग साेसायटी लिमिटेड’ के क्लब हाउस काे बंद करने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया है. न्यायमूर्ति मिलिंद एन. जाधव ने मैक्राेटेक की वर्ष 2023 की सिविल रिवीजन याचिका काे खारिज कर दिया और पुणे ट्रायल काेर्ट के उस फैसले काे सही ठहराया, जिसमें काेड ऑफ सिविल प्राेसीजर के ‘ऑर्डर तखख रूल 11(व)’ के तहत साेसायटी के मुकदमे काे शुरुआती स्तर पर ही खारिज करने से मना कर दिया गया था.
यह विवाद लाेढ़ा बेलमाेंडाे के भीतर ‘द रिजर्व’ नाम से पहचाने जाने वाले इलाके में, टाॅवर नंबर-26 के पीछे स्थित एक क्लब हाउस काे लेकर है. साेसायटी ने वकील रश्मि ढाेंगड़े और श्रीराम पिंगले के माध्यम से दावा किया कि यह क्लब हाउस प्राेजेक्ट की सुविधाओं का एक हिस्सा था, जिसे स्वीकृत याेजनाओं में दर्शाया गया था, इसका निर्माण हुआ और सदस्याें द्वारा इसका उपयाेग भी किया गया; लेकिन बाद में एक नई स्वीकृत याेजना के तहत इसे गिराए जाने के रूप में दिखा दिया गया. हाईकाेर्ट ने पाया कि डेवलपर का 20 सितंबर, 2021 की 7वीं स्वीकृत याेजना में माैजूदा क्लब हाउस काे गिराकर उसी स्थान पर एक नई संरचना बनाने का प्रस्ताव था. काेर्ट के रिकाॅर्ड के अनुसार, इसके बाद अक्टूबर 2022 में साेसायटी के सदस्याें काे क्लब हाउस में प्रवेश करने और उसका उपयाेग करने से राेक दिया गया था.
रेरा मांगी गई राहत नहीं दे सकता. साेसायटी ने मुकदमे काे समाप्त करने की डेवलपर की काेशिश का विराेध किया.
वकील पिंगले के निर्देश पर पेश हुई वकील ढाेंगड़े ने तर्क दिया कि सेंट एंड्रयूज एक पंजीकृत सहकारी गृहनिर्माण संस्था और एक अलग कानूनी यूनिट है.
ढाेंगड़े की मुख्य दलील यह थी कि यह विवाद केवल ऐसा दावा नहीं था जिसका निर्णय रेरा के तहत किया जा सके. साेसायटी 7वीं स्वीकृत याेजना की वैधता के संबंध में घाेषणा और स्थायी स्थगनादेश (स्टे ऑर्डर) की मांग कर रही थी. उन्हाेंने तर्क दिया कि रेरा प्राधिकारियाें द्वारा ऐसी राहतें नहीं दी जा सकतीं.
हाईकाेर्ट ने रेरा की धारा-79, 88 और 89 का परीक्षण किया और इस धारणा काे खारिज कर दिया कि यह कानून किसी प्रमाेटर और हाउसिंग साेसायटी से जुड़े हर सिविल उपाय काे अपने आप बाहर कर देता है.